सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु

सोयाबीन की खेती
सोयाबीन  की खेती : उत्तराखण्ड में सोयाबीन  खरीफ की मुख्य तिलहनी फसल है। सोयाबीन में 20 प्रतिशत तेल व 40 प्रतिशत प्रोटीन पाई जाती है। सोयाबीन से दूध, दही, पनीर, आटा, नमकीन एवं कई अन्य प्रकार के व्यजंन भी बनाये जाते  है। सोयाबीन की खेती मैदानी क्षेत्रों में अभी हाल में ही कुछ वर्षो से शुरू हुई हैI इसमे 40 से 50 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20 से 22 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती हैI इसके प्रयोग से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलती हैI प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी जनपदों एवम बदाऊ, रामपुर, बरेली, शा...
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कैमोमिल (Chamomile) या गुलेबबुना की खेती कैसे करें?

कैमोमाइल
कैमोमिल या गुलेबबुना की खेती कैसे करें? साधारण नाम- कैमोमिल, गुलेबबुना। वानस्पतिक नाम- कैमोमिला rikyutita। उन्नत किस्म- वेल्लरी, प्रशांत, सीमैप- सम्मोहक। उपयोग- फूल तथा उससे प्राप्त तेल, फूलों का उपयोग चाय, हर्बल , स्नान, सुगंधियों एवं सजावट के लिए तथा इसके तेल का उपयोग साबुन, कास्मेटिक, शैम्पू, क्रीम, फार्मास्युटिकल्स, घरेलू दवाइयां, माउथ वाश, सुगन्ध उपयोग एवं अरोमाथेरेपी में होता है। प्रमुख रासायनिक घटक- कैमोमिल के तेल में कैमोजुलिन रसायन की मात्रा 17-18 ℅ होती है। जल...
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मूली(Radish) उत्पादन की उन्नत तकनीक

radish(मूली )
मूली उत्पादन की उन्नत  तकनीक   महत्व – मूली का उपयोग प्रायः सलाद एवं पकी हुई सब्जी के रूप में किया जाता है इसमें तीखा स्वाद होता है। इसका उपयोग नाष्ते में दही के साथ पराठे के रूप में भी किया जाता है। इसकी पत्तियों की भी सब्जी बनाई जाती है। मूली विटामिन सी एवं खनीज तत्व का अच्छा स्त्रोत है। मूली लिवर एवं पीलिया मरीजों के लिए भी अनुसंषित है। जलवायु मूली के लिए ठण्डी जलवायु उपयुक्त होती है लेकिन अधिक तापमान भी सह सकती है। मूली की सफल खेती के लिए 10-150से. तापमान सर्वोत्तम  माना...
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खस या वेटीवर(vetiver) की खेती कैसे करें??

vetiver(खस)
 खस या वेटीवर की खेती कैसे करें? साधारण नाम- खस, वेटीवर वानस्पतिक नाम- kraisopogan जिजैनियोइडिस उन्नत किस्में- के एस- 1, के एस- 2, धारिणी, केशरी, गुलाबी, सिम-व्रद्धि, सीमैप खस- 15, सीमैप खस- 22, सीमैप खुशनलिका। उपयोग- जड़ो से प्राप्त सुगन्धित तेल, कास्मेटिक, साबुन एवं इत्र आदि में प्रयोग किया जाता है। इसका तेल उच्च श्रेणी का स्थिरक होने के कारण चन्दन, लेवेंडर एवं गुलाब के तेल पर ब्लेंडिंग में प्रयोग होता है। इसके अतिरिक्त तम्बाकू, ...
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नवम्बर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

नवम्बर माह में मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान, उर्द  व मूगं देर से बोई गई  फसल की कटाई कर लें और सुखाकर भंडारण की व्यवस्था करें। मूगंफली देर से बोई गई फसल की खुदाई  करें। अरहर शीघ्र पकने वाली किस्मों  की 75-80 प्रतिशत फलियां पकने पर कटाई कर लें। लम्बी अवधि की किस्मों में फलीछेदक कीट के रोकथाम के लिए मोनाक्रोटोफेास (36 एस.एल.) 1250 मिली. या डाइमेथाऐट 3. 0 इ.सी. 660 मिली.लीटर दवा को आवश्यक पानी में  मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें। ताेरिया दाना भरने की अवस्था में यदि ...
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अक्टूबर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अक्टूबर माह में मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान जो किस्में पक गई हो। उनकी कटाई कर लें। कटाई जड़ सेे सटाकर करें। भण्डारण हेतु दानों में नमी 12-14 प्रतिशत रखनी चाहिए। दरे से बोई गई फसल में फूल बनते समय खते में सिचांई  अवश्य करे। कभी-कभी गधी बगं का प्रकोप हो जाता है । इसकी रोक थाम के लिये इमिडाक्लाेिपड्र 17.8 एस.एल. का 150 मिली. या मोनोक्रोटाफास 36 एस. एल. का 1.4 मिली मात्रा प्रति हैक्टेयर  का फूल आने के बाद बूरकाव प्रात़ः या शाम को करें। मक्का समय से बोई गई फसल की  कटाई करे। सकंर व विजय मक...
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भारत में खेत नापने के लिए प्रयोग होने वाले मात्रक अथ्वा खेती के नाप|

खेती के नाप
खेती के नाप भारत में प्रयोग होने वाले खेती के नाप भारत के अधिकांश भागो में खेती के नाप के लिए गज, हाथ,गट्ठा, जरीब, बिस्‍सा, बिस्‍वॉनसी, उनवांनसी, कचवानसी,बीधा, किल्‍ला, एकड, हेक्‍टेअर, मरला, कनाल आदि मात्रकों का प्रयोग होता हैं। अगर इतिहास में झांके तो अकबर के शासनकाल के 1571 ई. से 1580 ई. (10 वर्षों) के आंकड़ों के आधार पर भू-राजस्व का औसत निकालकर ‘आइन-ए-दहसाला’ लागू किया गया। इस प्रणाली के अन्तर्गत राजा टोडरमल ने अलग-अलग फ़सलों पर नक़द के रूप में वसूल किये जाने वाला लगान का 1571 से...
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