आलू सब्जियों का राजा: तरीका सही या गलत ? कैसे कमाएं मुनाफा

आलू
आलू सब्जियों का राजा: आलू की फसल - आलू को अगर सब्जियों का राजा कहें तो गलत नहीं होगा. हर सब्जी के साथ आलू अपना स्वाद बढ़ा लेता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. आलू की फसल: तरीका सही या गलत आलू एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती बहुत कम समय में किसानों को ज्यादा फायदा देती है. अफ़सोस जनक बात यह है किसान इस से ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने से चूक जाते हैं और इसका कारण है खेती का पुराना तरीका. कैसे उगाएं आलू : आ...
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सफ़ेद सोना….यानि कपास….नया साल २०२० लेकर आएगा बंपर कपास..

कपास
सफ़ेद सोना....यानि कपास....नया साल २०२० लेकर आएगा बंपर कपास.. क्या है कपास ? कपास एक फसल है जिससे  रुई तैयार की जाती हैं, इसको सफेद सोना कहा जाता है.   कपास का इतिहास  हमारे देश की लगभग 9.4 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर कपास की खेती की जाती हैं। कपास का उल्लेख प्राचीन काल से सुनने में आता रहा है. हमारे प्रथम वेद यानि ऋग्वेद में भी इसका उल्लेख किया गया है,जिससे ये बात तो स्पष्ट है कि भारतीयों का कपास से सूती वस्र बनाने का ज्ञान प्राचीन काल से ही है. क्यों महत्वपूर्ण है कपास आज...
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गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए |

wheat
  गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिएः   - उन्नतशील प्रजातियों का चयन क्षेत्रानुसार परिस्थिति विशेष हेतु संस्तुत प्रजातियों का चुनाव करे ।  अपने प्रक्षेत्र पर 2-3 प्रजातियों की बुवाई करें ताकि रोग एवं कीटों के प्रकोप होने पर उपज में कमी न्यूनतम हो। भूमि की तैयारीः- बुवाई के समय खेत में खरपतवार एवं ढेले न हो तथा पर्याप्त नमी होनी चाहिए। अतः खेत में नमी की कमी हो तो जुताई से पूर्व पलेवा करे । खेत में ओट 1⁄4जब आसानी से जुताई की जा सके...
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खस या वेटीवर(vetiver) की खेती कैसे करें??

vetiver(खस)
 खस या वेटीवर की खेती कैसे करें? साधारण नाम- खस, वेटीवर वानस्पतिक नाम- kraisopogan जिजैनियोइडिस उन्नत किस्में- के एस- 1, के एस- 2, धारिणी, केशरी, गुलाबी, सिम-व्रद्धि, सीमैप खस- 15, सीमैप खस- 22, सीमैप खुशनलिका। उपयोग- जड़ो से प्राप्त सुगन्धित तेल, कास्मेटिक, साबुन एवं इत्र आदि में प्रयोग किया जाता है। इसका तेल उच्च श्रेणी का स्थिरक होने के कारण चन्दन, लेवेंडर एवं गुलाब के तेल पर ब्लेंडिंग में प्रयोग होता है। इसके अतिरिक्त तम्बाकू, ...
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जानिये कैसे होती है मक्का की खेत की स्थापना एवं प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन

मक्का
मक्का, धान एवं गेहूँ के बाद तीसरी मुख्य खाद्यान्न फसल हैं, इसे पोपकोर्न, स्वीटकोर्न, ग्रीनकोर्न एवं बेबीकोर्न के रूप में पहचान मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त इसे खाद्य तेल, रातिब, शराब आदि में भी उपयोग में लाया जा रहा है। मक्का को अनाज, दाना एवं चारे के रूप में सदियों से प्रयागे में लाया जा रहा है। मक्का की प्रजातियों का चुनाव मक्का की प्रजातियों को पकने के आधार पर तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है। 1.अगेती या शीघ्र पकने वाली प्रजातियां (75-80 दिन अवधि)- ये प्रजातियां बाढ़ ग्रस्त एवं असिंचित क्...
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राइसबीन की खेती मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए राइसबीन एक उपयुक्त फसल है। मध्य एवं ऊॅचाई (1500-2200 मी. तक) वाले क्षेत्रों में जहाँ पर दूसरी दलहनी फसल जैसे उर्द, मूँग , अरहर आदि उगाना सम्भव नहीं होता है, वहॉ राइसबीन की फसल सुगमतापूर्वक उगाई जा सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसे नौरंगी तथा रगड़मांस आदि नामों से जाना जाता है। आमतौर पर राइसबीन की फसल मिश्रित खेती के रूप में ली जाती है। परन्तु इसकी शद्धु खेती अधिक लाभदायक होती है। ‘‘राइसबीन-गेहूॅ’’ एक आदर्श फसल चक्र है जिससे गेहुँ की फसल को वांछित नत्रजन की मात्रा का क...
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जाने सूरजमुखी( Sunflower) की उन्नत खेती कैसे करे ?

सूरजमुखी
उन्नत किस्में सकंर किस्में                           पकने की अवधि  (दिन)                     उपज  (कु./है. ) एस.एस.एच.-6163                            90-95                                               20-22 एन.एस.एफ.एच.-36                         90-95                                                22-24 पी.ए.सी.-3776                                  95-100                                             22-24 सुपर ज्वालामुखी                                105-110                             ...
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जाने तिल( Sesame – Seed) की उन्नत खेती कैसे करे ?

तिल
तिल की उन्नत किस्में घाटी वाले क्षत्रे (1000 मीटर) तथा तराई एवं भावर क्षत्रे के लिए निम्न प्रजातियाँ हैं। प्रजातियाँ       पकने की अवधि (दिन)           उपज(कु./है.) टा-4                    90-100                                    6-7 टा-12                   85-90                                      5-6 टा-78                   80-85                                     6-7 शेखर                    80-85                                     6-7 प्रगति                    85-90            ...
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सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु

सोयाबीन की खेती
सोयाबीन  की खेती : उत्तराखण्ड में सोयाबीन  खरीफ की मुख्य तिलहनी फसल है। सोयाबीन में 20 प्रतिशत तेल व 40 प्रतिशत प्रोटीन पाई जाती है। सोयाबीन से दूध, दही, पनीर, आटा, नमकीन एवं कई अन्य प्रकार के व्यजंन भी बनाये जाते  है। सोयाबीन की खेती मैदानी क्षेत्रों में अभी हाल में ही कुछ वर्षो से शुरू हुई हैI इसमे 40 से 50 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20 से 22 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती हैI इसके प्रयोग से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलती हैI प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी जनपदों एवम बदाऊ, रामपुर, बरेली, शा...
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काकुन( कौणी ) के अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

पर्वतीय क्षेत्रों में उगाये जाने वाले मोटे अनाजों में काकुन का तीसरा स्थान है। यहाँ इसे कौणी के नाम से जाना जाता है। इसकी खेती मैदानी तथा समुद्र तल से 2200 मीटर की ऊँचाई तक की जाती है। अधिकांशत: काकुन को झंगोरा के साथ मिश्रित खेती के रूप में बोया जाता है। काकुन की उन्नत किस्में पी.आर.के.-1 पतं नगर विश्वविद्यालय के पर्वतीय परिसर, रानीचौरी (टिहरी) द्वारा हाल में विकसित की गई जो कि एक अगेती किस्म है। यह किस्म पर्वतीय क्षेत्रों में 1500-2200 मी. की ऊंचाई तक उपयुक्त पाई गई है। एक हेक्टेयर भूमि में ...
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