औषधीय खेती- नींबू घास (लेमन घास-LEMON GRASS) की खेती कैसे करें ,और इसके लाभ?

नींबू घास(Lemon Grass)
औषधीय खेती  - नींबू घास  (लेमन घास-LEMON GRASS) की खेती कैसे करें ? नींबू घास, मुख्य रूप से उत्तर भारत में उगाई जाने वाली घास है| लेमन ग्रास स्वास्थ्य के लिए एक उपयोगी हर्ब है| साधारण नाम- नींबू घास, लेमन घास (Lemon Grass in English) वानस्पतिक नाम- सिम्बोपोगोन फ्लेक्सुओसस, सिम्बोपोगोन पेन्डुलस एवं सिम्बोपोगोन खैसिएनस उन्नत किस्में- सिम- सिखर, कृष्णा, चिरहरित, कावेरी एवं सिम- स्वर्णा। प्रमुख रासायनिक घटक- सिट्राल प्रमुख घटक होता है। पौध परिचय- यह बहुवर्षीय एवं बार- बार काटी जा...
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गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए |

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  गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिएः   - उन्नतशील प्रजातियों का चयन क्षेत्रानुसार परिस्थिति विशेष हेतु संस्तुत प्रजातियों का चुनाव करे ।  अपने प्रक्षेत्र पर 2-3 प्रजातियों की बुवाई करें ताकि रोग एवं कीटों के प्रकोप होने पर उपज में कमी न्यूनतम हो। भूमि की तैयारीः- बुवाई के समय खेत में खरपतवार एवं ढेले न हो तथा पर्याप्त नमी होनी चाहिए। अतः खेत में नमी की कमी हो तो जुताई से पूर्व पलेवा करे । खेत में ओट 1⁄4जब आसानी से जुताई की जा सके...
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औषधीय कृषि- भुई आंवला (हजारदाना)की खेती कैसे करें।

bhuiAmla
साधारण नाम- हजारदाना वानस्पतिक नाम- फाइलेंथस एमरस उपयोग- सम्पूर्ण पौधे ( पंचांग ) का उपयोग परम्परागत रूप से पीलिया तथा अन्य बीमारियों में होता है। लोक औषधि में इसका प्रयोग गुर्दा रोग, मूत्ररोग, आंत सम्बन्धी बीमारियां, शर्करा तथा यकृत रोगों में होता है। फाइलेंन्थीन तथा हाइपोफाइलेंथीन इसके जैव सक्रिय यौगिक है। पौध परिचय- यह एक बहुवर्षीय पौधा है इसका तना सीधा तथा 10 से 60 सेमी होती है। इसमें आजीवन पुष्प निकलते हैं। जलवायु- इसके पौधे भारत में 700 मी. की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में बहुतायत मे...
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औषधीय कृषि – एकोरस ( वच -sweet flag-Vacha) की खेती कैसे करें।

एकोरस ( वच -sweet flag)
औषधीय कृषि -  एकोरस ( वच ) की खेती कैसे करें। साधारण नाम- वच वानस्पतिक नाम- एकोरस कैलेमस। उपयोग- भूस्त्रीय तने ( राइजोम ) का प्रयोग पारम्परिक रूप से तिक्त पाचक, पेट दर्द निवारक व अन्य बहुत सी बीमारियों में किया जाता हैं। पौध परिचय- सामान्यतया इसकी खेती दलदली, अर्ध जलप्लावित भूमि में बहुवर्षीय फसल के रूप में की जाती है जिसका भूस्त्रीय तना जमीन में फैलता रहता है। हिमालयी क्षेत्रों 2200 मीटर ऊंचाई तक व सम्पूर्ण भारत में इसके पौधे प्राकृतिक अवस्था में पाए जाते है। जलवायु- शीतोष्ण एवं समशीतोष्ण जलवाय...
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भारत में खेत नापने के लिए प्रयोग होने वाले मात्रक अथ्वा खेती के नाप|

खेती के नाप
खेती के नाप भारत में प्रयोग होने वाले खेती के नाप भारत के अधिकांश भागो में खेती के नाप के लिए गज, हाथ,गट्ठा, जरीब, बिस्‍सा, बिस्‍वॉनसी, उनवांनसी, कचवानसी,बीधा, किल्‍ला, एकड, हेक्‍टेअर, मरला, कनाल आदि मात्रकों का प्रयोग होता हैं। अगर इतिहास में झांके तो अकबर के शासनकाल के 1571 ई. से 1580 ई. (10 वर्षों) के आंकड़ों के आधार पर भू-राजस्व का औसत निकालकर ‘आइन-ए-दहसाला’ लागू किया गया। इस प्रणाली के अन्तर्गत राजा टोडरमल ने अलग-अलग फ़सलों पर नक़द के रूप में वसूल किये जाने वाला लगान का 1571 से...
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केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) क्या है ? जाने वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि!

वर्मीकम्पोस्ट
केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है।   केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने की सामान्य विधि केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए इस विधि में क्षेत्र का आकार (area) आवश्यकतानुसार रखा जाता है किन्तु मध्यम वर्ग के किसानों के लिए 100 वर्गमीटर क्षेत्र पर्याप्त रहता है। अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद बनाने के लिए सीमेन्ट तथा इटों से पक्की क्यारियां (Vermi-beds) बनाई जाती हैं। प्रत्येक क्यारी की लम्...
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