गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए |

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  गेहूं की अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिएः   - उन्नतशील प्रजातियों का चयन क्षेत्रानुसार परिस्थिति विशेष हेतु संस्तुत प्रजातियों का चुनाव करे ।  अपने प्रक्षेत्र पर 2-3 प्रजातियों की बुवाई करें ताकि रोग एवं कीटों के प्रकोप होने पर उपज में कमी न्यूनतम हो। भूमि की तैयारीः- बुवाई के समय खेत में खरपतवार एवं ढेले न हो तथा पर्याप्त नमी होनी चाहिए। अतः खेत में नमी की कमी हो तो जुताई से पूर्व पलेवा करे । खेत में ओट 1⁄4जब आसानी से जुताई की जा सके...
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IMPACT OF RICE CULTIVATION ON GLOBAL WARMING

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The atmospheric concentration of CH4 has been increasing rapidly in recent years. Because it is a radiative trace gas and takes part in atmospheric chemistry, the rapid increase could be of significant environmental consequence. The scientific report of the Intergovernmental Panel on Climate Change concluded that a 10 to 15% reduction in the CH4 emission from individual sources would stabilize the concentration in the atmosphere. Of the wide variety of sources, rice paddy fields are considered a...
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पपीते(Papaya) की फसल- किसानों को कम समय में अधिक लाभ कमाने का अवसर |

पपीते(Papaya)
वानस्पतिक नाम-  केरिका पपाया |  पपीता कैरिकेसी परिवार का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है You can also check out : खरबूजे(Muskmelon) की उन्नत खेती कैसे करें पपीता बहुत ही पौष्टिक एवं गुणकारी फल है। किसान पपीता की खेती अकेले या अमरूद, आम, बेर व नींबू के पेड़ों के बीच खाली जगह पर भी कर सकते हैं। पपीता को घर के आंगन में भी उगाया जा सकता है। पपीता लगाने के डेढ़ वर्ष बाद फल मिलने लगते हैं। कम समय, कम क्षेत्र, कम लागत में अधिक पैदावार व अधिक आय| पपीता स्वास्थ्यवर्द्धक तथा विटामिन ए से भरपूर फल होत...
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औषधीय कृषि- भुई आंवला (हजारदाना)की खेती कैसे करें।

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साधारण नाम- हजारदाना वानस्पतिक नाम- फाइलेंथस एमरस उपयोग- सम्पूर्ण पौधे ( पंचांग ) का उपयोग परम्परागत रूप से पीलिया तथा अन्य बीमारियों में होता है। लोक औषधि में इसका प्रयोग गुर्दा रोग, मूत्ररोग, आंत सम्बन्धी बीमारियां, शर्करा तथा यकृत रोगों में होता है। फाइलेंन्थीन तथा हाइपोफाइलेंथीन इसके जैव सक्रिय यौगिक है। पौध परिचय- यह एक बहुवर्षीय पौधा है इसका तना सीधा तथा 10 से 60 सेमी होती है। इसमें आजीवन पुष्प निकलते हैं। जलवायु- इसके पौधे भारत में 700 मी. की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में बहुतायत मे...
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औषधीय कृषि – एकोरस ( वच -sweet flag-Vacha) की खेती कैसे करें।

एकोरस ( वच -sweet flag)
औषधीय कृषि -  एकोरस ( वच ) की खेती कैसे करें। साधारण नाम- वच वानस्पतिक नाम- एकोरस कैलेमस। उपयोग- भूस्त्रीय तने ( राइजोम ) का प्रयोग पारम्परिक रूप से तिक्त पाचक, पेट दर्द निवारक व अन्य बहुत सी बीमारियों में किया जाता हैं। पौध परिचय- सामान्यतया इसकी खेती दलदली, अर्ध जलप्लावित भूमि में बहुवर्षीय फसल के रूप में की जाती है जिसका भूस्त्रीय तना जमीन में फैलता रहता है। हिमालयी क्षेत्रों 2200 मीटर ऊंचाई तक व सम्पूर्ण भारत में इसके पौधे प्राकृतिक अवस्था में पाए जाते है। जलवायु- शीतोष्ण एव...
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औषधीय कृषि – सनाय(Sine) की खेती कैसे करें?

सनाय(Sine) की खेती कैसे करें साधारण नाम- सनाय वानस्पतिक नाम- केसिया अंगुस्तिफोलिया उन्नत किस्म- सोना [By Lalithamba from India [CC BY 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/2.0)], via Wikimedia Commons] Also read : कैमोमिल (Chamomile) या गुलेबबुना की खेती कैसे करें? उपयोग- फलियों के छिलके तथा पत्तियों का उपयोग यूनानी एवं भारतीय चिकित्सा पद्यति में दस्तावर औषधि के रूप में होता है। सम्पूर्ण पौधे में सेनोसाइट पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा फलियों के छिलकों में 3-4℅ तथा पत्ति...
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प्रतिबंधित कीटनाशकों को भारत में खुलेआम बेचा और प्रयोग किया जा रहा है|इस से बचें और इसे रोकें|

प्रतिबंधित कीटनाशक
प्रतिबंधित कीटनाशक - भारत में खुलेआम बेचा और प्रयोग किया जा रहा है| आपसे बेहतर इस तथ्य को कौन समझ सकता है कि खेती के मामले में जहर पर हमारी निर्भरता कितनी बढ़ चुकि है। फसल उगाने से पहले खेत में जहर डालना शुरू करते हैं तो भण्डारण तक नहीं रूकते। बात यहीं खत्म हो जाती तो गनीमत था, अब तो फल-सब्जियों को पकाने और देर तक ताजा रखने के लिए भी जहर का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। एक आश्चर्यजनक सच्चाई यह भी है कि दुनिया भर के प्रतिबंधित कीटनाशक को भारत में खुलेआम बेचा और प्रयोग किया जा रहा है। फल-सब्जियो...
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जानिये घर और फसलों में दीमक से छुटकारा पाने के आसान उपाय

फसलों में दीमक
दीमक एक कटिबंधों में सबसे हानिकारक कीट हैं और कृषि के क्षेत्र में काफी समस्याएं, पैदा कर सकता है|दीमक की कुल 2500 प्रजातियाँ होती हैं इनके घोंसलों भूमिगत होते है, इसके रोकथाम के लिए कुछ उपाय निम्न हैं | 1- मटका विधि आवश्यक  सामग्री 1-मक्का के भुट्टे की गिंड़याँ 2- मिटटी का घड़ा 3- सूती कपडा You Can Also Check Out:- प्रमुख फफूंदीनाशी रसायन प्रयोग विधि  मक्का के भुट्टे के दाने  निकलने के बाद जो गिल्लियां बचती है (आठ से दस गिल्लियां ) उन्हें मिटटी के घड़े में इकट्ठा कर घड़े में रख क...
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कैसे करें मधुमक्खी पालन? मधुवाटिका में मधुमक्खियों की देखरेख एवं प्रबन्धन.

मौन गृह
कैसे करें मधुमक्खी पालन ? मधुवाटिका एवं प्रबन्धन मधुमक्खियों सहित मौन गृह रखे जाने वाले स्थान को मधुवाटिका कहते है। अधिक शहद उत्पादन लेने के लिए यह आवश्यक है कि पूरे वर्ष भर मधुवाटिका की उचित देख रेख समयानुसार करे। एक सफल मौन पालक को मौसम तथा विभिन्न ऋतुओं के अनुसार मौन को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में ज्ञान बहुत जरूरी है| विभिन्न ऋतुओं के अनुसार मौन गृह का देख-रेख करते हुये मौन पालक अपेक्षाकृत अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। अतः एक मौनपालक को मौसम के अनुसार निम्न प्रकार से मौनगृह का ...
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औषधीय कृषि – कैमोमिल (Chamomile) या गुलेबबुना की खेती कैसे करें?

कैमोमाइल
कैमोमिल या गुलेबबुना की खेती कैसे करें? साधारण नाम- कैमोमिल, गुलेबबुना। वानस्पतिक नाम- कैमोमिला rikyutita। उन्नत किस्म- वेल्लरी, प्रशांत, सीमैप- सम्मोहक। उपयोग- फूल तथा उससे प्राप्त तेल, फूलों का उपयोग चाय, हर्बल , स्नान, सुगंधियों एवं सजावट के लिए तथा इसके तेल का उपयोग साबुन, कास्मेटिक, शैम्पू, क्रीम, फार्मास्युटिकल्स, घरेलू दवाइयां, माउथ वाश, सुगन्ध उपयोग एवं अरोमाथेरेपी में होता है। प्रमुख रासायनिक घटक- कैमोमिल के तेल में कैमोजुलिन रसायन की मात्रा 17-18 ℅ होती है। जल...
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