मुख्य पोषक तत्वों का महत्व, कमी के लक्षण एवं विभिन्न फसलों हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिंदु

पोषक तत्वों
पौधों की वृद्धि के लिए 18 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ये पोषक तत्वों को मिट्टी, पानी एवं वायुमण्डलीय गैसों द्वारा पौधों को प्राप्त होते है। इन 18 पोषक तत्वों में से कुल 6 पोषक तत्व मुख्य पोषक तत्वों की श्रेणी में आते हैं जैसे- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं सल्फर। यदि मिट्टी में इन आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो पौधों अपना जीवन-चक्र सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर पाते है। मुख्य पोषक तत्वों की कमी के लक्षण पौधों में पोषक तत्वों की कमी या असन्तलु न अव्यवस्था ...
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जानिये कैसे होती है मक्का की खेत की स्थापना एवं प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन

मक्का
मक्का, धान एवं गेहूँ के बाद तीसरी मुख्य खाद्यान्न फसल हैं, इसे पोपकोर्न, स्वीटकोर्न, ग्रीनकोर्न एवं बेबीकोर्न के रूप में पहचान मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त इसे खाद्य तेल, रातिब, शराब आदि में भी उपयोग में लाया जा रहा है। मक्का को अनाज, दाना एवं चारे के रूप में सदियों से प्रयागे में लाया जा रहा है। मक्का की प्रजातियों का चुनाव मक्का की प्रजातियों को पकने के आधार पर तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है। 1.अगेती या शीघ्र पकने वाली प्रजातियां (75-80 दिन अवधि)- ये प्रजातियां बाढ़ ग्रस्त एवं असिंचित क्...
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राइसबीन की खेती मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए राइसबीन एक उपयुक्त फसल है। मध्य एवं ऊॅचाई (1500-2200 मी. तक) वाले क्षेत्रों में जहाँ पर दूसरी दलहनी फसल जैसे उर्द, मूँग , अरहर आदि उगाना सम्भव नहीं होता है, वहॉ राइसबीन की फसल सुगमतापूर्वक उगाई जा सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसे नौरंगी तथा रगड़मांस आदि नामों से जाना जाता है। आमतौर पर राइसबीन की फसल मिश्रित खेती के रूप में ली जाती है। परन्तु इसकी शद्धु खेती अधिक लाभदायक होती है। ‘‘राइसबीन-गेहूॅ’’ एक आदर्श फसल चक्र है जिससे गेहुँ की फसल को वांछित नत्रजन की मात्रा का क...
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पंतनगर ,अल्मोड़ा और मेरठ में किसान मेला इस अक्टूबर।

Kisan Mela2017
पंतनगर में किसान मेला   Kisan Mela will be organized during October 06-09, 2017.            मेरठ में किसान मेला       अल्मोड़ा में किसान मेला         DO VISIT & LET US ALSO KNOW IF YOU ARE GOING THERE: For more information about Kisan Mela Please email us your details:- Name- MobileNo- Team-Agriavenue   Email us at :     agriavenue@gmail...
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जाने सूरजमुखी( Sunflower) की उन्नत खेती कैसे करे ?

सूरजमुखी
उन्नत किस्में सकंर किस्में                           पकने की अवधि  (दिन)                     उपज  (कु./है. ) एस.एस.एच.-6163                            90-95                                               20-22 एन.एस.एफ.एच.-36                         90-95                                                22-24 पी.ए.सी.-3776                                  95-100                                             22-24 सुपर ज्वालामुखी                                105-110                             ...
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DOWNLOAD – MAJOR USES OF PESTICIDE- PLANT GROWTH REGULATORS (PGR) & MAJOR USES OF BIOPESTICIDES

PGR
MAJOR USES OF PESTICIDE- PLANT GROWTH REGULATORS (PGR).      Download the PDF below:  PLANT GROWTH REGULATORS-PGR          MAJOR USES OF BIOPESTICIDES                      Download the PDF below:  BIOPESTICIDES CIB       Courtesy: GOVERNMENT  OF INDI A Ministry of Agriculture  &Farmers   Welfare Department of Agriculture, Cooperation&Farmers Wel fare Directorate of Plant Protection, Quarantine &...
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जाने तिल( Sesame – Seed) की उन्नत खेती कैसे करे ?

तिल
तिल की उन्नत किस्में घाटी वाले क्षत्रे (1000 मीटर) तथा तराई एवं भावर क्षत्रे के लिए निम्न प्रजातियाँ हैं। प्रजातियाँ       पकने की अवधि (दिन)           उपज(कु./है.) टा-4                    90-100                                    6-7 टा-12                   85-90                                      5-6 टा-78                   80-85                                     6-7 शेखर                    80-85                                     6-7 प्रगति                    85-90            ...
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सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु

सोयाबीन की खेती
सोयाबीन  की खेती : उत्तराखण्ड में सोयाबीन  खरीफ की मुख्य तिलहनी फसल है। सोयाबीन में 20 प्रतिशत तेल व 40 प्रतिशत प्रोटीन पाई जाती है। सोयाबीन से दूध, दही, पनीर, आटा, नमकीन एवं कई अन्य प्रकार के व्यजंन भी बनाये जाते  है। सोयाबीन की खेती मैदानी क्षेत्रों में अभी हाल में ही कुछ वर्षो से शुरू हुई हैI इसमे 40 से 50 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20 से 22 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती हैI इसके प्रयोग से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलती हैI प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी जनपदों एवम बदाऊ, रामपुर, बरेली, शा...
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काकुन( कौणी ) के अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

पर्वतीय क्षेत्रों में उगाये जाने वाले मोटे अनाजों में काकुन का तीसरा स्थान है। यहाँ इसे कौणी के नाम से जाना जाता है। इसकी खेती मैदानी तथा समुद्र तल से 2200 मीटर की ऊँचाई तक की जाती है। अधिकांशत: काकुन को झंगोरा के साथ मिश्रित खेती के रूप में बोया जाता है। काकुन की उन्नत किस्में पी.आर.के.-1 पतं नगर विश्वविद्यालय के पर्वतीय परिसर, रानीचौरी (टिहरी) द्वारा हाल में विकसित की गई जो कि एक अगेती किस्म है। यह किस्म पर्वतीय क्षेत्रों में 1500-2200 मी. की ऊंचाई तक उपयुक्त पाई गई है। एक हेक्टेयर भूमि में ...
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मूंग (green gram) की बुवाई का उपयुक्त समय एवं अधिकतम उत्पादन हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

मूंग
मूंग- बुवाई का समय पर्वतीय क्षत्रेा में मूंग की बुवाई का उपयुक्त समय घाटिया में जून का द्वितीय पखवाडा़ है। विलम्ब से बुवाई करन पर उपज में कमी आ जाती है। तराई-भावर एव मैदानी क्षत्रेा में मूंग की बुवाई का सर्वाेत्तम समय जुलाई क अन्तिम सप्ताह से अगस्त का दसूरा सप्ताह है। जायद में बुवाई का उचित समय मार्च के द्वितीय पखवाड से 10 अप्रैल तक है। तराई क्षत्रे में मूंग की बुवाई मार्च क अतं तक कर लनेी चाहिए। बुवाई की विधि बुवाई कॅूड में हल के पीछ कर। पंक्ति से पंक्ति की दरूी 30-45 स.मी. हानेी चाहिए। ...
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