मूंग (green gram) की बुवाई का उपयुक्त समय एवं अधिकतम उत्पादन हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

मूंग
मूंग- बुवाई का समय पर्वतीय क्षत्रेा में मूंग की बुवाई का उपयुक्त समय घाटिया में जून का द्वितीय पखवाडा़ है। विलम्ब से बुवाई करन पर उपज में कमी आ जाती है। तराई-भावर एव मैदानी क्षत्रेा में मूंग की बुवाई का सर्वाेत्तम समय जुलाई क अन्तिम सप्ताह से अगस्त का दसूरा सप्ताह है। जायद में बुवाई का उचित समय मार्च के द्वितीय पखवाड से 10 अप्रैल तक है। तराई क्षत्रे में मूंग की बुवाई मार्च क अतं तक कर लनेी चाहिए। बुवाई की विधि बुवाई कॅूड में हल के पीछ कर। पंक्ति से पंक्ति की दरूी 30-45 स.मी. हानेी चाहिए। ...
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क्या आप जानते हो सेम(Beans, Green Beans) की उन्नत खेती कैसे होती है ?

सेम-beans
As per famous Encyclopedia - Wikipedia "Green beans are the unripe, young fruit and protective pods of various cultivars of the common bean (Phaseolus vulgaris).Immature or young pods of the runner bean (Phaseolus coccineus), yardlong bean (Vigna unguiculata subsp. sesquipedalis), and hyacinth bean (Lablab purpureus) are used in a similar way.Green beans are known by many common names, including French beans, string beans, snap beans, and snaps." सेम(Beans) की उन्नत खेती कैसे करे   ?   ...
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आड़ू (Peaches) के अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

आड़ू
आड़ू की खेती मध्य पर्वतीय क्षत्रे, घाटी तथा तराई एवं भावर क्षेत्रों में की जाती है। यह शीघ्र फल देता है। अतः इसकी बागबानी को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। आड़ू की प्रमुख किस्में पर्वतीय क्षेत्र (मध्य व ऊँचे क्षेत्र के लिए) शीघ्र पकने वाली-जून अर्ली, अलेक्जेन्डर, अर्लीव्हाइटजाईट मध्यम समय- एलवर्टा, हेल्स अर्ली, क्राफोर्ड अर्ली (तोतापरी), अर्ली रिवर्स, जे.एच. हेल्स, पैराडीलक्स देर से पकने वाली-जुलाई अलवर्टा, रेड नेक्ट्रीन, गोल्डेन बुश, पैरीग्रीन, स्टारकिंग डेलीशस परागण-अधिकांश किस्म...
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नाशपाती (Pear) के अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

नाशपाती
नाशपाती की खेती ऊंचे पर्वतीय क्षत्रे से लकेर घाटी, तराई एवं भावर क्षेत्र तक की जाती है। नाशपाती की मुख्य किस्में पर्वतीय क्षेत्र (मध्य एवं ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र 1600-2400 मी.) अगेती- थम्वपियर, डा. जूल्स गॉयट, अर्ली चाइना मध्य- व्यूरे  डी अमने लिस, बग्गूगोसा, डायनडेयुकोमिस , विक्टोरिया, कान्फ्रेंस, फ्लेमिस व्यूटी पछेती - विन्टर नेलिस , व्यरूहार्डी , विलियम (वार्टलटे ), मैक्सरेड वार्टलेट, जार्गनेल, पैखम्स ट्रायफ घाटी, तराई एवं भावर- चायनापियर, लिंकान्टे, कीफर, गाले ा, स्मिथ, पत्...
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सेब (Apple) के अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

सेब
सेब के डेलिशस वर्ग की किस्मो की खेती 2400 मी. तक या इससे अधिक ऊँचाई तथा उत्तरी ढलान पर 3400 मी. तक करना लाभकारी पाया गया है। इस ऊँचाई तथा इससे कम ऊँचाई 1500 मी. ऊँचाई पर स्पर किस्में उगाई जा सकती हैं। सेब की उन्नत किस्में शीघ्र तैयार होने वाली- अर्ली सनवरी, फैनी, बिनोनी , चाबै टिया प्रिसं जे , चाबै टिया अनुपम, टिडमनै अर्ली बरसेस्टर, वैन्स डेलीशस मध्य अवधि - रेड डेलीशस, रायल डेलीशस, गोल्डेन डेलीशस, रिच-ए-रेड, कोर्ट लैन्ड, रेड गोल्ड, मैकिनटाँस रेडस्पर, गोल्ड स्पर, स्कारलेटगाला, आरगनस्पर,...
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Basil (Tulsi-तुलसी)- What is it & how to grow it?

Basil(Tulsi-तुलसी)
Basil(Tulsi-तुलसी.) Ocimum tentiform (synonym Ocimum sanctum), commonly known as holy basil, or tulsi, is an aromatic plant in the family Lamiaceae which is native to the Indian subcontinent and widespread as a cultivated plant throughout the Southeast Asian tropics. Tulsi is cultivated for religious and medicinal purposes, and for its essential oil. It is widely known across the Indian subcontinent as a medicinal plant and a herbal tea, commonly used in Ayurveda, and has an important role w...
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झंगोरा (मादिरा/साॅवा) की उन्नत फ़सल कैसे करे ?

झंगोरा
पर्वतीय क्षेत्रों की उपराऊ भूमि में परम्परागत द्विवर्षीय फसल चक्र ‘‘मडुुवा-परती-चेतकी धान/ झंगोरा-गेहू  के अन्र्तगत झंगोरा या मादिरा की खेती की जाती है। यह दाने के साथ-साथ चारे के लिए भी एक महत्वपूर्ण फसल है। झंगोरा की उन्नत किस्में वी.एल.-29: यह अल्पावधि 1⁄485-90 दिन1⁄2 वाली किस्म है। वी.एल. मादिरा-172ः यह मध्यम अवधि वाली 1⁄495-100 दिन1⁄2 वाली किस्म है। पी.आर.जे.-1ः यह विलम्ब अवधि वाली 1⁄4120-130 दिन1⁄2 किस्म है। उपरोक्त किस्मों से लगभग 20-25 कु./है. 1⁄440-50 कि.ग्रा. प्रति नाली1⁄2 ...
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अक्टूबर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अक्टूबर माह
अक्टूबर माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान जो किस्में पक गई हो। उनकी कटाई कर लें। कटाई जड़ सेे सटाकर करें। भण्डारण हेतु दानों में नमी 12-14 प्रतिशत रखनी चाहिए। दरे से बोई गई फसल में फूल बनते समय खते में सिचांई  अवश्य करे। कभी-कभी गधी बगं का प्रकोप हो जाता है । इसकी रोक थाम के लिये इमिडाक्लाेिपड्र 17.8 एस.एल. का 150 मिली. या मोनोक्रोटाफास 36 एस. एल. का 1.4 मिली मात्रा प्रति हैक्टेयर  का फूल आने के बाद बूरकाव प्रात़ः या शाम को करें। मक्का समय से बोई गई फसल की  कटाई करे। सकंर व विजय...
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धनिया (coriander)की उन्नत फ़सल कैसे करे ?

धनिया
धनिया एक बहुमूल्य बहुउपयोगी मसाले वाली आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी फसल है। धनिया के बीज एवं पत्तियां भोजन को सुगंधित एवं स्वादिष्ट बनाने के काम आते हैं।  सामान्यतः इसका उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है| मारवाडी भाषा में इसे धोणा कहा जाता है।  इसके बीज को सुखाकर सूखे मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। जलवायु ऐसे  क्षेत्र इसके सफल उत्पादन के लिए सर्वोत्तम माने गए है धनिये की अधिक उपज एवं गुणवत्ता के लिए शुष्क एवं ठंडी जलवायु उपयुक्त रहती है इसे खुली धुप की आवश्यक...
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सितम्बर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

सितम्बर माह
सितम्बर माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले अरहर फसल को पत्ती लपटेक एवं फलीबेधक कीट नुकसान पहुँचा सकते है। इन कीटों की रोकथाम  लिये मोनोक्रोटोफास 3र्6 इ.सी. की 1.0 मिली. दवा या क्वीनालफास 25 इ.सी. की 1.0 मि.ली. दवा एक लीटर पानी में घोल कर छिड़काव व करना चाहिए। फाइटोपथोरा झुुसला की रोक थाम के लियेे रिडाेिमल 2.5 किग्रा प्रति हैक्टेयर की दर से आवश्यक पानी में घोल कर छिड़काव  करना चाहिए। सोयाबीन गडिर्ल बीटिल व फलीछेदक कीटों की रोकथाम के लिये कार्बारिल 50 प्रतिशत धूल चूर्ण 2.0 किग्रा या क्लो...
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