Basil (Tulsi-तुलसी)- What is it & how to grow it?

Basil(Tulsi-तुलसी)
Basil(Tulsi-तुलसी.) Ocimum tentiform (synonym Ocimum sanctum), commonly known as holy basil, or tulsi, is an aromatic plant in the family Lamiaceae which is native to the Indian subcontinent and widespread as a cultivated plant throughout the Southeast Asian tropics. Tulsi is cultivated for religious and medicinal purposes, and for its essential oil. It is widely known across the Indian subcontinent as a medicinal plant and a herbal tea, commonly used in Ayurveda, and has an important role w...
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झंगोरा (मादिरा/साॅवा) की उन्नत फ़सल कैसे करे ?

झंगोरा
पर्वतीय क्षेत्रों की उपराऊ भूमि में परम्परागत द्विवर्षीय फसल चक्र ‘‘मडुुवा-परती-चेतकी धान/ झंगोरा-गेहू  के अन्र्तगत झंगोरा या मादिरा की खेती की जाती है। यह दाने के साथ-साथ चारे के लिए भी एक महत्वपूर्ण फसल है। झंगोरा की उन्नत किस्में वी.एल.-29: यह अल्पावधि 1⁄485-90 दिन1⁄2 वाली किस्म है। वी.एल. मादिरा-172ः यह मध्यम अवधि वाली 1⁄495-100 दिन1⁄2 वाली किस्म है। पी.आर.जे.-1ः यह विलम्ब अवधि वाली 1⁄4120-130 दिन1⁄2 किस्म है। उपरोक्त किस्मों से लगभग 20-25 कु./है. 1⁄440-50 कि.ग्रा. प्रति नाली1⁄2 ...
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अक्टूबर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अक्टूबर माह
अक्टूबर माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान जो किस्में पक गई हो। उनकी कटाई कर लें। कटाई जड़ सेे सटाकर करें। भण्डारण हेतु दानों में नमी 12-14 प्रतिशत रखनी चाहिए। दरे से बोई गई फसल में फूल बनते समय खते में सिचांई  अवश्य करे। कभी-कभी गधी बगं का प्रकोप हो जाता है । इसकी रोक थाम के लिये इमिडाक्लाेिपड्र 17.8 एस.एल. का 150 मिली. या मोनोक्रोटाफास 36 एस. एल. का 1.4 मिली मात्रा प्रति हैक्टेयर  का फूल आने के बाद बूरकाव प्रात़ः या शाम को करें। मक्का समय से बोई गई फसल की  कटाई करे। सकंर व विजय...
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धनिया (coriander)की उन्नत फ़सल कैसे करे ?

धनिया
धनिया एक बहुमूल्य बहुउपयोगी मसाले वाली आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी फसल है। धनिया के बीज एवं पत्तियां भोजन को सुगंधित एवं स्वादिष्ट बनाने के काम आते हैं।  सामान्यतः इसका उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है| मारवाडी भाषा में इसे धोणा कहा जाता है।  इसके बीज को सुखाकर सूखे मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। जलवायु ऐसे  क्षेत्र इसके सफल उत्पादन के लिए सर्वोत्तम माने गए है धनिये की अधिक उपज एवं गुणवत्ता के लिए शुष्क एवं ठंडी जलवायु उपयुक्त रहती है इसे खुली धुप की आवश्यक...
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सितम्बर माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

सितम्बर माह
सितम्बर माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले अरहर फसल को पत्ती लपटेक एवं फलीबेधक कीट नुकसान पहुँचा सकते है। इन कीटों की रोकथाम  लिये मोनोक्रोटोफास 3र्6 इ.सी. की 1.0 मिली. दवा या क्वीनालफास 25 इ.सी. की 1.0 मि.ली. दवा एक लीटर पानी में घोल कर छिड़काव व करना चाहिए। फाइटोपथोरा झुुसला की रोक थाम के लियेे रिडाेिमल 2.5 किग्रा प्रति हैक्टेयर की दर से आवश्यक पानी में घोल कर छिड़काव  करना चाहिए। सोयाबीन गडिर्ल बीटिल व फलीछेदक कीटों की रोकथाम के लिये कार्बारिल 50 प्रतिशत धूल चूर्ण 2.0 किग्रा या क्लो...
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धान(paddy) की उन्‍नत प्रजातियॉं(जो मुख्यतः भारत में उगाए जाते हैं), पैदावार कुन्‍तल/हैक्‍टेयर एवं वि‍शेषताऐं |

धान-paddy- की उन्‍नत प्रजातियॉं
धान (Paddy)एक प्रमुख फसल है जिससे चावल निकाला जाता है। यह भारत सहित एशिया एवं विश्व के बहुत से देशों का मुख्य भोजन है। विश्व में धान (चावल) के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कम आय वाले देशों में छोटे स्तर के किसानों द्वारा उगाया जाता है   धान के अधिकतम उत्पादन हेतु ध्यान देने हेतु विशेष बिन्दु।   धान की उन्‍नत प्रजातियॉं -जो मुख्यतः भारत में उगाए जाते हैं Varieties (कि‍स्‍में) Production पैदावार कुन्‍तल/हैक्‍टेयर Characteristics (वि‍शेषताऐं) ...
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अगस्त माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अगस्त माह
अगस्त माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान नत्रजन की पहली 1/4 भाग मात्रा कल्ले फूटते समय एवं दूसरी 1/4 भाग मात्रा बालियों में गोभ के निकलने से पहले यूरिया के रूप में टॉपड्रेसिंग के रूप में डाले। धान के खैरा रोग नियंत्रण के लिये जिंक सल्फेट 5 किग्रा. तथा यूरिया 20 किग्रा. को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर  की दर से छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा के लक्षण दिखाई देते ही 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन व 500 ग्राम कापर आक्सी-क्लोराइड को आवश्यक पानी में घोलकर प्रति हैक्टर छिड़काव करें।...
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मिर्च की नर्सरी या पौधशाला लगाने की उन्नत तकनीक तथा ध्यान देन योग्य चीजें

मिर्च की नर्सरी
मिर्च की नर्सरी लगाने की उन्नत तकनीक   पौधशाला (नर्सरी) क्या है? पहले यह समझना  है. पौधशाला या रोपणी अथवा नर्सरी एक ऐसा स्थान हैं जहां पर बीज अथवा पौधे के अन्य भागों से नये पौधों को तैयार करने के लिये उचित प्रबंध किया जाता है. पौधशाला का क्षेत्र सीमित होने के कारण देखभाल करना आसान एवं सस्ता होता है.   1.टमाटर व मिर्च की खेती एक ही खेत मे या नज़दीकी खेत मे न करें क्योंकि इनमे कीड़े व रोग एक जैसी होती हैं। सहफसलों से एंथ्राक्नोज़ और बेक्टीरियल झुलसा रोग फैल सकते हैं। 2. अध...
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जुलाई माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

जुलाई माह
जुलाई माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान : धान की रोपाई इस माह समाप्त कर ले l रोपाई  के लिए 20-30 दिन पुरानी पौध प्रयोग करें। रोपाई लाइनों में  करे। एक स्थान पर दो पौध रोपें । रोपाई  वाले धान में खरपतवार नियत्रंण के लिये ब्यूटाक्लोेर 50 इ.सी. 30 लीटर या एनीफोलास 30 इ.सी. 1.65 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई  के 3-4 दिन के अन्दर प्रयोग करना चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग धान की किस्म व  मृदा उर्वरकता जाँच के आधार पर करना चाहिए। यदि किसी कारणवश भूमि परीक्षण न हुआ हो तो उर...
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मिट्टी की उर्वरकता में सुधार-मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड भूमि संरक्षण और सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व

मिट्टी की उर्वरकता में सुधार
मिट्टी की उर्वरकता में सुधार-मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड भूमि संरक्षण और सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व   1.  तिलहन, दलहन, पाम ऑयल और मक्का की एकीकृत योजना (आईएसओपीओएम) के अंतर्गत: 1.1 जिप्सम / पाइराइट / चूना / डोलोमाइट की सप्लाई -> 750 प्रति हेक्टेयर 1.2 अभाव वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की सप्लाई -> 500 प्रति हेक्टेयर 2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन एफ एस एम) के अंतर्गत: 2.1 गेहूं में जिप्सम की सप्लाफई -> एक साथ जिप्सिम और सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए गेहूं के ...
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