अंजीर(Fig) कैसे उगायें और इसके चमत्कारी उपयोगिता |

अंजीर(Fig)_1
अंजीर(Fig) (अंग्रेजी नाम फ़िग, वानस्पतिक नाम: "फ़िकस कैरिका", प्रजाति फ़िकस, जाति कैरिका, कुल मोरेसी) एक वृक्ष का फल है जो पक जाने पर गिर जाता है। पके फल को लोग खाते हैं। सुखाया फल बिकता है। सूखे फल को टुकड़े-टुकड़े करके या पीसकर दूध और चीनी के साथ खाते हैं। इसका स्वादिष्ट जैम (फल के टुकड़ों का मुरब्बा) भी बनाया जाता है। सूखे फल में चीनी की मात्रा लगभग ६२ प्रतिशत तथा ताजे पके फल में २२ प्रतिशत होती है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन 'ए' और 'बी' काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके खाने से कोष्ठबद्धता...
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जून माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

जून माह
जून माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले मूंग की पकी हुई फलियों की चुनाई कर लें या 60-80 प्रतिशत फलियों के पकने पर कटाई करें। उर्द की कटाई फसल पूरी पक जाने पर करे। इस समय फलियां काली पड़ जाती हैं। अरहर कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई (उपास 120 इत्यादि) इस माह में कर ले। नमी की कमी में पलेवा करके बुवाई करे। 12-15 किग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। बुवाई कतारों में 45-60 सेमी.की दूरी पर करें। मक्का इस माह मक्का की बुवाई करे। ध्यान रहे कि नमी के अभाव में पले...
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What is GST & Its Impact on Agriculture Sector ?

gst
So there is an uproar of GST ,GST ,,GST..,... all around since few months.  Let's understand what is GST first?     What is GST? For a Layman GST is "A single comprehensive tax levied on goods and services consumed in an economy" Few interesting things you would like to know about GST The concept of GST appeared first time in India , in 2006-2007 Union Budget speech. Concept of GST was first devised by a German economist during 18th Centur...
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मई माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

मई माह
मई माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले गेहूॅं पूर्ण पकी फसल की अविलम्ब कटाई कर लेनी चाहिये। गहाई करके भण्डारण करे। आगामी वर्श में बीज के लिये प्रयोग किये जाने वाले गेहूँ को सौर ताप विधि से उपचारित करके रखें, ताकि फसल में खुला कण्डुआ रोग से बचाव हो सके। जौ, चना व मसूर जिन फसलों की गहाई न की गई हो तो जल्द कर लें । भण्डारित कर लें ताकि वर्षा आदि से नुकसान न हो। उर्द व मूंग फसलों की आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। फलियों की तुड़ाई के बाद फसल को खेत में पलट देने से वह हरी खाद ...
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अप्रैल माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अप्रैल माह
अप्रैल माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले गेहूॅं एवं जौ इन फसलों के पकने पर समय से कटाई करना सुनिश्चित करें ताकि अधिक सूखने पर कटाई के समय दाना झ़ड़ने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। चना एवं मटर दाना पकने की अवस्था में फसलों की समय से कटाई कर लें । अप्रैल के प्रथम पखवाड़े में देर से बोये गये चने की फलियों में दाना पड़ रहा होगा, अगर इस समय फलीछेदक सूडी हानि पहुंचाती है तो इसके नियंत्रण के लिये मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी. की 750मि.ली. दवा को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टर की दर ...
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ऐसे व्यवसाय जिनसे आप करोड़ों कमा सकते हैं, वह भी थोड़े ही खर्चे में!

DairyFarming
किसान भाइयों ये सभी वो कृषि(farming) व्यवसाय  है, जिनकी आज मांग हर जगह है और आप इन्हें शुरू करके काफी पैसा कमा सकतें हैं किसान भाई कोई भी काम शुरू करने से पहले पूरी तरह अपने आसपास के बाजार की पूरी जानकारी ले । हर व्यवसाय में लाभ के साथ जोखिम भी होता है ये हमेशा धयान रखे । तुलसी की खेती(holy basil Farming) एलोवेरा की खेती (Aloevera Farming)   मशरूम की खेती(Mushroom Farming) Mushrooms are not plants and require different conditions for optimal growth. Plants develop through ...
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केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) क्या है ? जाने वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि!

वर्मीकम्पोस्ट
केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है।   केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने की सामान्य विधि केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए इस विधि में क्षेत्र का आकार (area) आवश्यकतानुसार रखा जाता है किन्तु मध्यम वर्ग के किसानों के लिए 100 वर्गमीटर क्षेत्र पर्याप्त रहता है। अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद बनाने के लिए सीमेन्ट तथा इटों से पक्की क्यारियां (Vermi-beds) बनाई जाती हैं। प्रत्येक क्यारी की लम्...
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मार्च माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

मार्च माह
मार्च माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले  गेहूं:- गेहेूं की फसल में नमी का अभाव न होने दें और स्थिति देखकर सिंचाई करें । इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पानी देते समय तेज हवा न चल रही हो। मण्डुसी व जंगली जई जैसे खरपतवारों को नष्ट कर दें। खुला कन्डुवा से ग्रसित गेहेूं की बालियों को देखते ही खेत से सावधानीपूव कर् लिफाफे से ढक कर निकाल दें तथा मिट्टी में गहरे दबाकर नष्ट करें या जला दें। कन्डुवा ग्रसित बालियों को निकालते समय पौधों को कम से कम हिलाएं अन्यथा फंफूदी बिखर कर बीज को संक्रमित कर द...
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फरवरी माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

फरवरी माह
फरवरी माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले गेहूँ समय से बोई गई गेहूँ की फसल अब पुष्पावस्था में आ रही है। इस समय चौथी सिंचाई अवश्य करें । दिसम्बर के द्वितीय पखवाड़े में बोई गई फसल में चौैडी़ पत्ती वाले खरपतवारों की रोकथाम के लिए बुवाई के 40-45 दिन बाद 2,4-डी. 80 प्रतिशत शुद्धता वाली दवाई की 625 ग्राम मात्रा प्रति हैक्टर को 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें आजकल गेहूँ में करनाल बन्ट रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। अतः स्वस्थ एवं निरोगी बीज पैदा करने हेतु बाली आते ही 2 किलोग्राम मैकोजेव या 500 मिली. प...
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Do you know about – Integrated Pest Management in major vegetable crops?

Pest Management
Insect pests and diseases are among the major constraints to enhancing production and productivity of vegetable crops. In recent years, farmer incomes have been declining particularly due to the rising costs of inputs for plant protection. Plant protection in the present day is mainly oriented towards chemical control. In India, insecticides are used much more than other pesticides such as fungicides and herbicides. In some areas, farmers are applying 25 to 40 chemical sprays to the crop particu...
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