धान(paddy) की उन्‍नत प्रजातियॉं(जो मुख्यतः भारत में उगाए जाते हैं), पैदावार कुन्‍तल/हैक्‍टेयर एवं वि‍शेषताऐं |

धान-paddy- की उन्‍नत प्रजातियॉं
धान (Paddy)एक प्रमुख फसल है जिससे चावल निकाला जाता है। यह भारत सहित एशिया एवं विश्व के बहुत से देशों का मुख्य भोजन है। विश्व में धान (चावल) के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कम आय वाले देशों में छोटे स्तर के किसानों द्वारा उगाया जाता है   धान के अधिकतम उत्पादन हेतु ध्यान देने हेतु विशेष बिन्दु।   धान की उन्‍नत प्रजातियॉं -जो मुख्यतः भारत में उगाए जाते हैं Varieties (कि‍स्‍में) Production पैदावार कुन्‍तल/हैक्‍टेयर Characteristics (वि‍शेषताऐं) ...
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अगस्त माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

अगस्त माह
अगस्त माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान नत्रजन की पहली 1/4 भाग मात्रा कल्ले फूटते समय एवं दूसरी 1/4 भाग मात्रा बालियों में गोभ के निकलने से पहले यूरिया के रूप में टॉपड्रेसिंग के रूप में डाले। धान के खैरा रोग नियंत्रण के लिये जिंक सल्फेट 5 किग्रा. तथा यूरिया 20 किग्रा. को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर  की दर से छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा के लक्षण दिखाई देते ही 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन व 500 ग्राम कापर आक्सी-क्लोराइड को आवश्यक पानी में घोलकर प्रति हैक्टर छिड़काव करें।...
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मिर्च की नर्सरी या पौधशाला लगाने की उन्नत तकनीक तथा ध्यान देन योग्य चीजें

मिर्च की नर्सरी
मिर्च की नर्सरी लगाने की उन्नत तकनीक   पौधशाला (नर्सरी) क्या है? पहले यह समझना  है. पौधशाला या रोपणी अथवा नर्सरी एक ऐसा स्थान हैं जहां पर बीज अथवा पौधे के अन्य भागों से नये पौधों को तैयार करने के लिये उचित प्रबंध किया जाता है. पौधशाला का क्षेत्र सीमित होने के कारण देखभाल करना आसान एवं सस्ता होता है.   1.टमाटर व मिर्च की खेती एक ही खेत मे या नज़दीकी खेत मे न करें क्योंकि इनमे कीड़े व रोग एक जैसी होती हैं। सहफसलों से एंथ्राक्नोज़ और बेक्टीरियल झुलसा रोग फैल सकते हैं। 2. अध...
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जुलाई माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

जुलाई माह
जुलाई माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले धान : धान की रोपाई इस माह समाप्त कर ले l रोपाई  के लिए 20-30 दिन पुरानी पौध प्रयोग करें। रोपाई लाइनों में  करे। एक स्थान पर दो पौध रोपें । रोपाई  वाले धान में खरपतवार नियत्रंण के लिये ब्यूटाक्लोेर 50 इ.सी. 30 लीटर या एनीफोलास 30 इ.सी. 1.65 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई  के 3-4 दिन के अन्दर प्रयोग करना चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग धान की किस्म व  मृदा उर्वरकता जाँच के आधार पर करना चाहिए। यदि किसी कारणवश भूमि परीक्षण न हुआ हो तो उर...
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मिट्टी की उर्वरकता में सुधार-मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड भूमि संरक्षण और सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व

मिट्टी की उर्वरकता में सुधार
मिट्टी की उर्वरकता में सुधार-मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड भूमि संरक्षण और सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व   1.  तिलहन, दलहन, पाम ऑयल और मक्का की एकीकृत योजना (आईएसओपीओएम) के अंतर्गत: 1.1 जिप्सम / पाइराइट / चूना / डोलोमाइट की सप्लाई -> 750 प्रति हेक्टेयर 1.2 अभाव वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की सप्लाई -> 500 प्रति हेक्टेयर 2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन एफ एस एम) के अंतर्गत: 2.1 गेहूं में जिप्सम की सप्लाफई -> एक साथ जिप्सिम और सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए गेहूं के ...
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किसान मूंगफली (ground-nut) की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं ,जाने मूँगफली की उन्नत खेती कैसे करे?

मूंगफली-ground-nut
किसान मूंगफली की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं ,जाने मूँगफली की उन्नत खेती कैसे करे मूँगफली की फसल उष्ण कटिबन्ध की मानी जाती है, परन्तु इसकी खेती शीतोष्ण कटिबन्ध के परे समशीतोष्ण कटिबन्ध  में भी, उन स्थानो  पर जहाँ गर्मी का मौसम पर्याप्त लम्बा हो, की जा सकती है  । जीवन काल में थोड़ा पानी, पर्याप्त धूप तथा सामान्यतः कुछ अधिक तापमान, यही इस फसल की आवश्यकताएं है । जहाँ रात में तापमान अधिक गिर जाता है, वहाँ पौधो  की बाढ़ रूक जाती है । इसी बजह से पहाड़ी क्षेत्रो  में 3,500 फिट से अधिक ऊँचाई पर ...
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अंजीर(Fig) कैसे उगायें और इसके चमत्कारी उपयोगिता |

अंजीर(Fig)_1
अंजीर(Fig) (अंग्रेजी नाम फ़िग, वानस्पतिक नाम: "फ़िकस कैरिका", प्रजाति फ़िकस, जाति कैरिका, कुल मोरेसी) एक वृक्ष का फल है जो पक जाने पर गिर जाता है। पके फल को लोग खाते हैं। सुखाया फल बिकता है। सूखे फल को टुकड़े-टुकड़े करके या पीसकर दूध और चीनी के साथ खाते हैं। इसका स्वादिष्ट जैम (फल के टुकड़ों का मुरब्बा) भी बनाया जाता है। सूखे फल में चीनी की मात्रा लगभग ६२ प्रतिशत तथा ताजे पके फल में २२ प्रतिशत होती है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन 'ए' और 'बी' काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके खाने से कोष्ठबद्धता...
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जून माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

जून माह
जून माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले मूंग की पकी हुई फलियों की चुनाई कर लें या 60-80 प्रतिशत फलियों के पकने पर कटाई करें। उर्द की कटाई फसल पूरी पक जाने पर करे। इस समय फलियां काली पड़ जाती हैं। अरहर कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई (उपास 120 इत्यादि) इस माह में कर ले। नमी की कमी में पलेवा करके बुवाई करे। 12-15 किग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। बुवाई कतारों में 45-60 सेमी.की दूरी पर करें। मक्का इस माह मक्का की बुवाई करे। ध्यान रहे कि नमी के अभाव में पले...
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What is GST & Its Impact on Agriculture Sector ?

gst
So there is an uproar of GST ,GST ,,GST..,... all around since few months.  Let's understand what is GST first?     What is GST? For a Layman GST is "A single comprehensive tax levied on goods and services consumed in an economy" Few interesting things you would like to know about GST The concept of GST appeared first time in India , in 2006-2007 Union Budget speech. Concept of GST was first devised by a German economist during 18th Centur...
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मई माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

मई माह
मई माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले गेहूॅं पूर्ण पकी फसल की अविलम्ब कटाई कर लेनी चाहिये। गहाई करके भण्डारण करे। आगामी वर्श में बीज के लिये प्रयोग किये जाने वाले गेहूँ को सौर ताप विधि से उपचारित करके रखें, ताकि फसल में खुला कण्डुआ रोग से बचाव हो सके। जौ, चना व मसूर जिन फसलों की गहाई न की गई हो तो जल्द कर लें । भण्डारित कर लें ताकि वर्षा आदि से नुकसान न हो। उर्द व मूंग फसलों की आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। फलियों की तुड़ाई के बाद फसल को खेत में पलट देने से वह हरी खाद ...
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