Do you know about – Integrated Pest Management in major vegetable crops?

Pest Management
Insect pests and diseases are among the major constraints to enhancing production and productivity of vegetable crops. In recent years, farmer incomes have been declining particularly due to the rising costs of inputs for plant protection. Plant protection in the present day is mainly oriented towards chemical control. In India, insecticides are used much more than other pesticides such as fungicides and herbicides. In some areas, farmers are applying 25 to 40 chemical sprays to the crop particu...
More

Do you know what is “BIO-REMEDIATION” Of Polluted Soil & Water?

1. What is bioremediation? Bioremediation is the use of microbes to clean up contaminated soil and groundwater. Microbes are very small organisms, such as bacteria, that live naturally in the environment. Bioremediation stimulates the growth of certain microbes that use contaminants as a source of food and energy. [source-https://clu-in.org/] Bioremediation is a treatment process that uses naturally occurring microorganisms (yeast, fungi, or bacteria) to break down, or degrade, hazardou...
More

फसलों में रोगों की रोकथाम हेतु बायोएजेन्ट (जैव अभिकर्ता)|

फसलों में रोगों की रोकथाम
फसलों में रोगों की रोकथाम फसलों में  रोगों,कीटों व खरतावारों से अत्यधिक क्षति होने के कारण वर्तमान में किसान अनियंत्रित ढंग से कृषि रासायनों का प्रयोग कर रहे है। कृषि रसायनों के अनियंत्रित प्रयोग के अप्रत्यक्ष दुष्परिणाम है, जैसे कीट व्याधियों का कृषि रासायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, प्राकृतिक शत्रुओं का विनाश, मनुष्य व पशुओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या, पर्यावरण प्रदूषण इत्यादि है। उपलब्ध भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यकता होती है एक प्रभावशाली सुरक्षा प्रणाली की, जोकि निम्न लागत, टिका...
More

बीजोपचार का कृषि मे महत्व एवंम लाभ |

बीजोपचार
बीजोपचार का कृषि मे महत्व एवंम लाभ कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता उत्पादकता को बनाये रखने तथा बढ़ाने मे बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उत्तम बीज का होना अनिवार्य है। उत्तम बीजों के चुनाव के बाद उनका उचित बीजोपचार भी जरूरी है क्यों कि बहुत से रोग बीजो से फैलते है। अतः रोग जनको, कीटों एवं असामान्य परिस्थितियों से बीज को बचाने के लिए बीजोपचार एक महत्वपूर्ण उपाय है।   Also check out :भारत में प्रयोग होने वाले खेती के नाप       बीजोपचार के...
More

मल्चिंग(Plastic Mulching) क्या है? मल्चिंग विधि |

मल्चिंग
मल्चिंग(Plastic Mulching) -खेत में लगे पोधो की जमीन को चारो तरफ से प्लास्टिक फिल्म के द्वरा सही तरीके से ढकने की प्रणाली को पलास्टिक मल्चिंग कहते है। यह फिल्म कई प्रकार और कई रंग में आती है। इस तकनीक का क्या फ़ायदा होता है। इस तकनीक से खेत में पानी की नमी को बनाये रखने और वाष्पीकरण रोका जाता है। ये तकनीक खेत में मिटटी के कटाव को भी रोकती है। और खेत में खतपतवार को होने से बचाया जाता है। बागवानी में होने वाले खतपतवार नियन्त्रण एवं पोधो को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने में बहुत सहायक होती है।क्यों क...
More

काली मिर्च की खेती (Black Pepper) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

काली मिर्च की खेती Black Pepper
काली मिर्च (पाइपर नाइग्रम) एक बहुवर्षीय वेल है, जो पाईपरेसी परिवार से सम्बन्धित है । इसके छोटे गोल फल, मसाले और औषधी दोनों रूपों में इस्तेमाल किए जाते हैं । वाणिज्यिक रूप से काली मिर्च और सफेद मिर्च बाजार में मिलती है । पके फलों को वैसे ही सूखाकर काली मिर्च तैयार की जाती है और सफेद मिर्च अच्छी तरह पके हुए फलों की बाहरी त्वचा हटाने के बाद उसे सूखाकर तैयार की जाती है । काली मिर्च का प्रयोग मसाले के रूप में विभिन्न खाद्य पदार्थों को तैयार करने में तथा औषधी के रूप में होता है । पूरे विश्व में ...
More

तोरिया की खेती (Toria Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु

तोरिया की खेती
तराई-भावर में तोरिया की खेती (लाही), पीली सरसों एवं राई की खेती रबी मौसम में मुख्य तिलहनी फसल के रुप से की जाती है। इनकी उत्पादकता बढ़ाने हेतु फसलबार इन बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दे। अल्प अवधि में अधिक उपज क्षमता की सामर्थ्य होने के कारण तोरिया को कैच क्राप के रुप में खरीफ एवं रबी मौसम के बीच मैदानी, तराई एवं भावर तथा निचले पर्वतीय क्षेत्रों में उगाकर अतिरिक्त लाभ अर्जित किया जा सकता है। तोरिया की खेती में बीज दर एवं बुवाई की विधि 4 कि.ग्रा. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर प्रयागे करनी चा...
More

सोयाबीन की खेती (Soybean Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं फसल सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु

सोयाबीन की खेती
सोयाबीन  की खेती : उत्तराखण्ड में सोयाबीन  खरीफ की मुख्य तिलहनी फसल है। सोयाबीन में 20 प्रतिशत तेल व 40 प्रतिशत प्रोटीन पाई जाती है। सोयाबीन से दूध, दही, पनीर, आटा, नमकीन एवं कई अन्य प्रकार के व्यजंन भी बनाये जाते  है। सोयाबीन की खेती मैदानी क्षेत्रों में अभी हाल में ही कुछ वर्षो से शुरू हुई हैI इसमे 40 से 50 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20 से 22 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती हैI इसके प्रयोग से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलती हैI प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी जनपदों एवम बदाऊ, रामपुर, बरेली, शा...
More

अरहर कीट नियंत्रण – अरहर में होने वाले हानिकारक कीटों का प्रबंधन।

Split red gram bugs
अरहर कीट नियंत्रण : अरहर की फसल मे होने वाले कीटों का विवरण। अरहर कीट नियंत्रण : अरहर की फसल को कीटो से वचाव के लिए क्या करे फलीबेधक कीट इनकी गिडारे फलिय़ों के अदंर घुसकर दाने को खाकर हानि पहुॅचाती है। प्रौढ कीटो का अनुश्रवण करने के लिए 5-6 फरेमेने प्रपचं/है. की दर से फसल मे फूल आते समय लगाय़े यदि 5-6 माथ प्रति प्रपचं दो-तीन दिन लगातार दिखाई देतो निम्नलिखितमे किसी एक दवा का प्रयागे फसल मे फूल आने पर करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो दसूरा छिडक़ाव 15 दिन के बाद करे, इससे अरहर की फसल का कीटो से वचाव ...
More

उर्द कीट प्रबंधन – उर्द में लगने वाले कीट का नियंत्रण।

black gram
उर्द में लगने वाले कीट की संभावनाए, और उन पर कैसे नियंत्रण स्थापित करे । उर्द में लगने वाले कीट तना मक्खी सुडिय़ा द्वारा ने को खोखला अथवा सुरगं बनाकर नुकसान पहुॅचाया जाता है। जिसस पौधा पीला पडक़र बाद में सुख जात है। बुवाई के पर्वू बीज का इमिडाक्लाेप्रड का 3 मि.ली. अथवा डायमथ्ऐट 30 ई.सीका 8 मि.ली./कि.ग्रा. की दर से उपचारित कर के बुवाई करें। मानाक्रेटेफेस/डाईमथ्ऐट/मिथाइल डिमटेन 1.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से फसल जमाव के एक सप्ताह बाद छिडक़ाव करे। बिहार रोमिल सूड़ी सिडयॉ पत्तिया का खाकर...
More