जून माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

जून माह में  मैदानी क्षेत्र में होने वाली फसले

मूंग की पकी हुई फलियों की चुनाई कर लें या 60-80 प्रतिशत फलियों के पकने पर कटाई करें। उर्द की कटाई फसल पूरी पक जाने पर करे। इस समय फलियां काली पड़ जाती हैं।

अरहर कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई (उपास 120 इत्यादि) इस माह में कर ले। नमी की कमी में पलेवा करके बुवाई करे। 12-15 किग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। बुवाई कतारों में 45-60 सेमी.की दूरी पर करें।

मक्का इस माह मक्का की बुवाई करे। ध्यान रहे कि नमी के अभाव में पलेवा अवश्य करें। प्रति हैक्टर 18-20 किग्रा. बीज पर्याप्त होता है। बुवाई लाइनों में (60 x 20 सेमी) पर करें। कंचन, सूर्या नवीन, पंत संकुल मक्का-3 प्रजाति आदि किस्मों की बुवाई करें। यह ध्यान रहे कि संकर किस्मों का बीज प्रति वर्ष नया प्रयोग करें।

बाजरा बारानी क्षेत्रों में मानसून सत्र की पहली अच्छी वर्षा पर बुवाई शुरू कर दें। औसतन 4-5 किग्रा. बीज प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। फसल की बुवाई 45 सेमी. की दूरी पर 4 सेमी. गहरे कूड़ों में करे।

मूंगफली बुवाई माह के अन्तिम सप्ताह से शुरू करें तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पूरी कर लें। फैलने व कम फैलने वाली किस्मों की लाइन से लाइन की दूरी 45 सेमी. था गुच्छेदार किस्मों में 30 सेमी. एवं पौधों की दूरी 15-20 सेमी. रखें। गुच्छेदार किस्मों के लिये 80-100 किग्रा एवं फैलने वाली किस्मों के लिये 60-80 किग्रा गिरी प्रति हैक्टर की दर से पर्याप्त होती है।

सोयाबीन मैदानी क्षेत्रों में जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह का समय बुवाई के लिए सर्वोत्तम है। सोयाबीन का 75-80 किग्रा बीज प्रति हैक्टर प्रयोग किया जाय। बुवाई 45 से.मी. की दूरी पर लाइनों में करें। बीज से बीज की दूरी 3 से 5 सेमी. रखें। बीज को 3-4 सेमी. से अधिक गहरा नहीं बोना चाहिए।

ज्वार:- ज्वार की बुवाई का सही समय जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई का प्रथम सप्ताह है। एक हैक्टर क्षेत्रफल के लिये 12-15 किग्रा. बीज की आवश्यकता पड़ती है। बुवाई 45 सेमी. की दूरी पर लाइनों में करे। पौधे से पौधे की दूरी 15-20सेमी. होनी चाहिए।

गन्ना आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहे व खेत में खरपतवार निकालते रहे। यूरिया की अन्तिम टापडंेसिंग न की गई होतो इस माह अवश्य कर लें। फसल पर मिट्टी चढ़ाये। यदि नमी या वर्षा के बाद पायरिला का प्रकोप दिखाई दे तो तो मैलाथियान 50 ई.सी. की 1.00 लीटर या क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. का 1.50 लीटर को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अंगोला बेधक, तना बेधक व जड़बेधक की रोकथाम के लिये मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल का 1500 मिली. दवा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें। पत्ती के भूरा धब्बा रोग की रोकथाम के लिये ब्लाइटाक्स 50 नामक दवा 2-2.5 किग्रा. आवश्यक पानी में मिलाकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

धान माह के दूसरे पखवाड़े से रोपाई शुरू कर दे। पौधों की रोपाई लाइनों में करे। लाइन से लाइन की दूरी 15-20 सेमी. रखें। एक स्थान पर कम से कम दो पौधे रोपें। खरपतवारों की रोकथाम प्रारम्भ से ही की जाये। असिंचित दशाओं में मैदानी क्षेत्रों में सीधी बुवाई के लिये 90-110 दिन में पकने वाली जातियों की बुवाई करनी चाहिये। बीज की मात्रा 70-80 किग्रा. प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिये। लाइन से लाइन की दूरी 20 सेमी. रखनी चाहिये। यदि पलेवा लगाकर धान की बुवाई करनी हो तो 100-110 किग्रा. बीज प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। बीज को 12 घण्टे पानी में भिगोकर लगभग 45 घण्टे तक ढेर बनाकर रखना चाहिये जिससे बीजों में अंकुरण शुरू हो जाये।

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जून माह में पर्वतीय क्षेत्र होने में वाली फसले

धान जेठी धान की बुवाई करे, इसकी बुवाई का उपयुक्त समय मई अन्तिम सप्ताह से जून का प्रथम सप्ताह है। सिंचित दशा में घाटियों में डाली गई नर्सरी में जब पौध की 4-5 पत्तियां निकल आवे तब खेत में रोपाई करें। जेठी धान के लिये विवेक धान 54, वी.एल.धान 221, तथा सिंचित (तलाऊ) क्षेत्रों में गोविन्द, पन्त धान-6, पन्त धान-11,वी.एल.62, वी.एल.-81, विवेक धान 82, विवेक धान 85 इत्यादि प्रजातियों में से क्षेत्रानुसार चयन कर सकते हैं। जेठी धान के लिये 2.0 किग्रा. बीज प्रति नाली की दर से सीधी बुवाई के लिये प्रयेाग करें।

मंडुवा बुवाई के लिये उपयुक्त समय मई अन्त से जून मध्य तक है। सीधी बुवाई हेतु 160-200 ग्राम बीज प्रति नाली आवश्यकता पड़ती है

झंगोरा (मादिरा) खेत में खरपतवार न पनपने दें। खेत से खरपतवार निकालने हेतु निराई करे।

मक्का मक्का की बुवाई हेतु प्रति नाली 360-400 ग्राम बीज पर्याप्त होगा।

रामदाना बुवाई का उपयुक्त समय पहली वर्षा के तुरन्त बाद मई माह के द्वितीय पखवाड़े से जून का प्रथम पखवाड़ा है। प्रति नाली 30-40 ग्राम बीज बुवाई के लिये प्रयोग करे।

सोयाबीन:- सोयाबीन की बुवाई मई के अन्तिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक की जा सकती है। प्रति नाली 1.5 किग्रा बीज बुवाई के लिये प्रयोग करे।

जून माह में मैदानी क्षेत्र में होने वाली सब्जिया

टमाटर फरवरी, मार्च में रोपी गई फसल इस माह में समाप्त हो जाती है। बीज वाली फसल में बीज निकालें।

बैंगन फसल से तैयार फलों को तोड़कर बाजार भेजें। आवश्यकतानुसार सिंचाई तथा निराई-गुड़ाई करें। बीज वाली फसल से बीज निकालें। जुलाई-अगस्त में रोपाई हेतु बीज पौधशाला में बोंये। रोपाई के लिए 1000 से 1200 ग्राम बीज की पौध एक हैक्टर में डालंे। क्यारियां 15 सेमी. ऊंची, 5ग1 मीटर आकार वाली बनायें।

फूलगोभी, पत्तागोभी, व गांठ गोभी बीज वाली फसलों के कार्यक्रम को इस माह में ही समाप्त करें। कटाई करें, सुखायें व बीज निकालकर सुखायें अगेती फसल की रोपाई के लिए उन्नत किस्म के बीज की बुवाई पौधशाला में करें। क्यारियां 15 सेमी. ऊंची बनायें। क्यारियों का आकार 5ग1मीटर हो। एक हैक्टर की रोपाई के लिए 1200 से 1500 बीज बोयें।

मूली, गाजर व शलजम बीज वाली फसलों का कार्यक्रम समाप्त करें। फसल की कटाई करें, सुखाय़ें तथा बीज को निकालें।

प्याज, लहसुन यदि खुदाई नहीं हुई है तो शीघ्र करें, सुखायें तथा नम रहित ठण्डे स्थान पर भंडारण करें।

पालक, मेथी, धनिया बीज वाली फसलों के कार्यक्रम को समाप्त करें। फसल की कटाई करें। सुखाये व बीज निकालें।

भिण्डी, लोबिया तथा राजमा भिण्डी के फलों को तोड़कर बाजार भेजें। बीज वाली फसलों से तोड़ी गई फलियों को सुखायें व बीज निकालें। मई माह में फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई निकाई-गुड़ाई को करें। फल तथा तनाछेदक के लिए भिण्डी में 0.2 प्रतिशत सेविन नामक कीटनाशी का एक छिड़काव करें। भिण्डी को 50ग15 सेमी. था लोबिया को 30ग10 सेमी. की दूरी पर बोयें।

ग्वार लोबिया व भिण्डी के बराबर उर्वरक डालकर 50ग 10 सेमी. की दूरी पर बुवाई करें। जमीन में नमी का होना अति आवश्यक है।

मिर्च तैयार फलों की तुड़ाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई करें। पकी हुई मिर्च की तोड़कर सुखायें तथा बीज निकालें। वर्षाती फसल के पौधशाला में बीज बोयें। एक हैक्टर रोपाई के लिये 1000 से 1500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। क्यारियों 15 सेमी.,ऊंची तथा 5ग1 मीटर आकार की हों। ग्वाला, पूसा सदाबहार, पंत सी. इसकी उन्नत किस्में हैं।

खीरावर्गीय ग्रीष्मकालीन फसलें समाप्त हो रही है। फसलो।को तोड़कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। बीज वाली फसलों के फलों से बीज निकालकर सुखाएं। बीज में 8 प्रतिशत से अधिक नमी न हो। खरीफ की फसलों की बुवाई का उचित समय है। तोरई, लौकी, करेला व खीरा की खेती उत्तम है। पूसा चिकनी, पूसा सुप्रिय तोरई की पूसा समरप्रोलीफिक्सलौंग, नवनीत लौकी की उन्नत किस्म है। बाहरमासी, जौनपुरी लम्बा करेला की पोइनसेट, आलमगीर, टेस्टी, नूरी इत्यादि खीरे की उन्नत किस्में हैं। थाले 1.5ग1.0 मीटर की दूरी पर बनार्यें। प्रत्येक थाले में 5-6 बीज बोयें। खेत ऊंचा हो जिसमें वर्षा ऋतु का पानी न भरे।

अदरक, हल्दी, अरबी फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई व निराई करें। अदरक व हल्दी में 50 किलोग्राम यूरिया खड़ी फसल में डालकर सिंचाई करें। अरबी में 0.2 प्रतिशत इन्डोफिल 45 नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव करें। अरबी की वर्षाती फसल की बुवाई की जा सकती है।

चैलाई आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई व सिंचाई करें। तैयार पौधों को उखाड़कर छोटी-छोटी गड्ड़िया बनाकर बाजार भेजें।

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जून माह में पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली सब्जिया

आलू फसल में आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई करें। झुलसा नामक बीमारी के बचाव के लये 0.2 प्रतिशत इन्डोफिल-45 नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव करें। फसल में 50 किलोग्राम यूरिया डालें। ऊंचे क्षेत्रों में बोआई का उचित समय है, बोआई करें।

टमाटर फसल में आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई व सिंचाई करें। घाटी में फसल तैयार हो रही होगी। फलों को तोड़कर बाजार भेजें। झुलसा नामक बीमारी के बचाव के लिये 0.2 प्रतिशत इन्डोफिल-45 नामक दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोपाई करें

बैंगन फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई करें। घाटियों में फल तैयार हो रहे होगें। फलों की तुड़ाई करें व बाजार भेंजे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोपाई का सही समय है, रोपाई करे।

मिर्च फसल में आवश्यकतानुसार निराई, गुड़ाई व सिंचाई करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोपाई का सही समय है, रोपाई करें।

शिमला मिर्च फसल में आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई व सिंचाई करें। फलों को तोड़कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेापाई की जा सकती है।

फ्रैंचबीन फलियों की तुड़ाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई करें।

भिंडी, लोबिया घाटियों में फसल तैयार हो रही होगी। फलियों की तुड़ाई करें व बाजार भेजने की व्यवस्था करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई का उचित समय है। शीघ्र ही बोआई करें।

खीरावर्गी य सब्जिया घाटियों में फसलों में आवश्यकतानुसार निराई,गुड़ाई व सिंचाई करें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई का उचित समय है, शीघ्र ही बोआई करें।

पालक, धनियां, मेंथी घाटियों में फसलों में आवश्यकतानुसार निराई, गुड़ाई व सिंचाई करें। तैयार फसलों की कटाई करें व छोटे-छोटे बन्डल बांधकर बाजार भेजने की व्यवस्था करें।

मूली मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई करें। घाटियों में तैयार जड़ों को उखाड़कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें व आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई व सिंचाई करें।

फूलगोभी, पातगोभी, गांठ गोभी घाटियों में लगी फसलों में आवश्यकतानुसार निराई, गुड़ाई व सिंचाई करें। मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेापाई करें तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिये पौधशाला में बीज की बोआई करें।

अदरक,हल्दी जो फसलें पहले बोई जा चुकी हैं उनमें आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई करें। ऊंचाई व मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई करने की व्यवस्था करें।

जून माह में मैदानी क्षेत्र में होने वाले फल

आम बाग की सफाई करें। नए बाग लगाने के लिए गड्ढ़ों की भराई का कार्य पूर्ण करें। मध्यम समय में परिपक्व होने वाली किस्मो को तोड़कर बाजार भेजें। नर्सरी में कलम बांधे कलम बांधने के लिए चीरा अथवा स्फान कलम विधि का प्रयोग करें।

केला पिछले माह खोदे गए गड़ढ़ों को भर दें। बाग की सिंचाई करें। पर्णचित्ती रोग की रोकथाम हेतु 0.25 प्रतिशत ब्लाइटाक्स-50 के घोल का छिड़काव करें।

नीबूवर्गीय फल नए बाग लगाने के लिए गड्ढ़ों की भराई करें। जल निकास की नालियों की सफाई करें। फलदार पेड़ों में नाइट्रोजन व पोटाश की दूसरी मात्रा का प्रयोग करें।

अमरूद छोटे पौधों की दो बार सिंचाई करें। नए बाग लगाने के लिए गड़ढ़े भर दें।

पपीता बाग की सिंचाई करें। अगेती किस्म के फलों को तोड़कर बाजार भेजें। फलों की चिड़ियों व बर्रो से रक्षा करें।

बेर फलों को तोड़कर बाजार भेजें। गूटी बांधने का कार्य इस माह के अंत से प्रारम्भ कर दें। नए बाग लगाने के लिए गड़ढ़ों की भराई करें

लोकाट नए बाग लगाने हेतु गड़ढ़ों की भराई करें।

कटहल बाग में एक बार सिंचाई करें। फल विगलन रोग की रोकथाम के लिए ब्लाइटाक्स-50 का छिड़काव करें। नए बाग लगाने के लिए गड़ढ़ों की भराई करें। पके/परिपक्व फलों को तोड़कर बाजार भेजें।

आडू, नाशपाती, व आलूबुखारा आडू, आलूबुखारा की अगेती किस्मों के पके फलों को तोड़कर बाजार भेजें। बाग में जल निकास की नालियां बनाएं। बाग की एक सिंचाई करें।

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जून माह में पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले फल

सेब बाग में जल निकास की व्यवस्था करें। कीट की रोकथाम हेतु थालों में फोरेट अथवा कार्बोंफ्यूरान का प्रयोग करें।

नाशपाती बाग में जल निकास की व्यवस्था करें।

आड़ू बाग में जल निकास की नालियां बना लें।

आलुबुखारा बाग में जल निकास हेतु नालियां बनाएं।

खुबानी फलों को तोड़कर बाजार भेजें। बाग में जल निकास की व्यवस्था करें।

जून माह में होने वाले पुष्प

देशी गुलाब की बड़िग हेतु लगी हुई कलमों की तैयारी। रजनीगन्धा में पोषक तत्वों के मिश्रण का 15 दिन के अन्तर पर पर्णीय छिड़काव तथा एक सप्ताह के अन्तर पर क्यारियों की सिंचाई। माह के अन्त में गेंदा की फसल की दूसरी कटाई।
फल-सब्जी संरक्षण
आम के विभिन्न तरह के अचार तथा चटनी बनाई जा सकती है। इसकी डिब्बाबन्दी, जैम अमावट आदि बनाए जा सकते है। आलूबुखारा, आडू तथा खुबानी के विभिन्न उत्पाद बनाए जा सकते है। फालसा का रस तथा स्क्वैश बनाया जा सकता है। लीची के उत्पाद भी बनाए जाते है।

पशुपालन

गाय-भैंस:- लू से बचाने के लिए पशुओं को छायादार वृक्षों के नीचे बाधें। भैंसों को दिन के समय तालाब में रहने दें। पशुओं के घर साफ-सुथरे व हवादार रखें। माह के अन्त में वर्षा के बचाव हेतु व्यवस्था करें। बाह्य कृमि नाशक दवा दें।

भेंड़ व बकरी:- पेट के कीड़ों के बचाव हेतु कृमि नाशक दवा चिकित्सक के परामर्शानुसार पिलायें तथा गर्मी से बचायें।

कुक्कुट:- अधिक गर्मी के समय मुर्गियों की खुराक कम हो जाती है जिससे उन्हें प्रोटीन की मात्रा पूरी नहीे मिल पाती। अतः उनके भोजन में 2-3 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें। मुर्गी घर में तापमान कम रखे। शैंड के बाहर की जगह को गीला करें।

मत्स्य:– तालाब में पानी आने जाने के रास्तों पर जाली लगायें। चूना का प्रयोग करें (250 किग्रा. /है.) व 1 से 1.5 मी. तक पानी भरें। उर्वरा शक्ति की वृद्धि हेतु 10-20 कुन्तल/है./माह कच्चे गोबर की खाद का प्रयोग करें।

मौन:– गर्मी से बचाव के लिए प्रबंधन करें। लू से बचाव के लिए बाड़ का प्रबंधन करें। अतिरिक्त खाली छत्तों को मौनगृह से निकाल कर उचित भंडारण करें। मौन की आपसी लड़ाई रोकने के लिए मौनगृहों के मुख्य द्वार को छोटा करें।

One thought on “जून माह में मैदानी क्षेत्र एवं पर्वतीय क्षेत्र में होने वाली फसले, फल, पुष्प, पशुपालन।

  1. nice farming knowledge

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