औषधीय खेती- नींबू घास (लेमन घास-LEMON GRASS) की खेती कैसे करें?

औषधीय खेती  – नींबू घास  (लेमन घास-LEMON GRASS) की खेती कैसे करें

साधारण नाम- नींबू घास, लेमन घास

वानस्पतिक नाम- सिम्बोपोगोन फ्लेक्सुओसस, सिम्बोपोगोन पेन्डुलस एवं सिम्बोपोगोन खैसिएनस

उन्नत किस्में- सिम- सिखर, कृष्णा, चिरहरित, कावेरी एवं सिम- स्वर्णा।

प्रमुख रासायनिक घटक- सिट्राल प्रमुख घटक होता है।

पौध परिचय- यह बहुवर्षीय एवं बार- बार काटी जाने वाली घास है। पत्तियों से महत्वपूर्ण तेल प्राप्त होता है। अगर फसल काटने में देरी हो जाय तो फूल भी निकल आते हैं। फूलों में तेल नहीं होता है।

जलवायु- गर्म एवं नम जलवायु सर्वोत्तम है। उत्तर भारत के मैदानी भागों की, उष्ण, फसल उत्पादन हेतु उपयुक्त है।

भूमि- अच्छे जल निकास वाली औसत उर्वरता वाली मृदायें, जिनका पी.एच. 7.0- 8.5 के बीच हो सर्वोत्तम होती है। ऊसर एवं असिंचित मृदा में भी सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है।

प्रवर्धन- पुरानी फसल से प्राप्त कल्लों द्वारा रोपाई करते हैं। सिंचित अवस्था में एक हे. के लिये 55000 स्लिप्स की आवश्यकता होती है असिंचित अवस्था में अधिक स्लिप्स की आवश्यकता होती है तथा 45×30 सेमी. की दूरी पर लगाते हैं।

पौधरोपण व भूमि की तैयारी- जूं- जुलाई में मानसून आने के समय एवं सिंचित दशा में फरवरी मार्च में भी रोपाई की जाती है। सामान्यतय: सिंचित अवस्था में लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी. रखनी चाहिये। रोपाई से पहले जमीन में 2- 3 जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिये। खराब मृदाओं में दूरी कम कर देनी चाहिये।

खाद एवं उर्वरक- खेत की जुताई द्वारा अच्छी तैयारी करनी चाहिये, जहां तक सम्भव हो जैविक खादों का इस्तेमाल अच्छा है। यदि रासायनिक खादों का प्रयोग करना हो तो 150:60:60 किग्रा. नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश प्रतिवर्ष/हे. देना चाहिये। नत्रजन को 3- 4 बार में भूमि में पर्याप्त नमी की स्थिति में देना चाहिये। फास्फोरस एवं पोटाश प्रतिवर्ष कटाई के बाद जुलाई माह में गुड़ाई द्वारा भूमि में मिलाना चाहिये। असिंचित अवस्था में उपरोक्त की आधी मात्रा कर देनी चाहिये।

सिंचाई- आमतौर पर कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। सर्दियों में 2- 3 एवं गर्मियों में 4- 5 सिंचाई पर्याप्त रहती हैं। प्रत्येक कटाई के बाद सिंचाई अत्यन्त आवश्यक होती है।

कटाई- नींबू घास की कटाई के समय प्रत्येक कल्ले में 4- 5 पूरी तरह खुली हुई पत्तियां होनी चाहिये। कटाई हसिया द्वारा जमीन की सतह से करनी चाहिये।

उपज- नीबू घास की कृष्णा प्रजाति से 5 वर्ष की फसल के आधार पर सिंचित अवस्था में 200- 250 किग्रा. तेल प्रतिवर्ष/ हे. पैदा हो जाता है, जबकि असिंचित अवस्था में दो कटाई से 100- 125 किग्रा. तेल प्रतिवर्ष प्राप्त होता है।

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