गुलाब के फूलों (Rose Cultivation) मे अधिकतम उत्पादन एवं सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य विशेष बिन्दु।

गुलाब को इसकी सुन्दरता, रूप आकार एवं सुगन्ध के कराण ही फूलों का राजा माना गया है । अब गुलाब केवल मात्र शौक एवं सुन्दरता की दृष्टि से नहीं अपितु आर्थिक एवं पर्यावरण सुधार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है । गुलाब के पौधे उगाना यदि एक प्रचलित पुराना शौक है तो गुलाब की खेती करना भी व्यापारिक दृष्टि से उतना ही लाभकारी व्यवसाय है ।

गुलाब का प्रयोग न केवल सजावट के लिए, गुलदस्ते व हार आदि बनाने के लिए होता है बल्कि इससे गुलाबा जल, गुलकन्द आदि औषधियां भी बनाई जाती हैं।

Rose (गुलाब) Cultivation

भारत की राजधानी दिल्ली की मंडी में गुलाबा के फूलों की भारी मांग होने के कारण साथ लगते जिले गुड़गांव, फरीदाबाद वे सोनीपत के किसान गुलाब की खेती करके भारी लाभ कमा रहे हैं । इसके अतिरिक्त दूसरे देशों में भी गुलाब की मांग बढ़ रही है । अतः इसे निर्यात करने की भारी सम्भावनाओं को देखते हुए कीमतों में गिरावट आने का प्रश्न पैदा ही नहीं होता है ।

गुलाब की व्यापारिक खी के लिए अच्छी किसम के फूल प्राप्त करने हेतु निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ।

गुलाब के फूलों की किस्मे

1. हाईब्रिड-टीः– सुपर स्ठार, केयर लैसलव, कालिया, गांगा, सोनिया, संघारा, प्रैजिडैंट, राधा कृष्ण, जवाहर, गोल्डन-जाईन्ट, पूर्णिमा ।

2. फ्लोरीबण्डाः– गोल्डन टाईम, क्वीन-एलीजाबेथ, देवदासी, प्रेमा, आईसब्रग, देहली, प्रिन्स चितचोर, दीपक, हिमगिरी, चिगारी, सोनोरा, सी पर्ल।

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3. पालीएंथाः– स्वाति, रशमी, नर्तकी, प्रिती, अजन्ता ।

4. मिनीएजरजः– देहली स्कार लैट डार्क ब्यूटी, डैजलट, क्राई-क्राई, बेबी मास्कुरेट ।

5. कलाईम्बर्जः– देहली व्हाईट, देहली पर्ल, सैण्डर्ज, व्हाईट रैमबलर, स्नोगर्ल, डारयों पार्किन ।

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भूमि का चुनाव – गुलाब की खेती के लिए अच्छा जल निकास वाली रेतीली, दोमट भूमि अच्छी है । 6-6 पी.एच. मान की मिट्टी में गुलाब की खेती की जा सकती है ।

पौधे लगाने का समय –  गुलाब के पौधे लगाने का सर्वश्रेष्ठ समय अक्तूबर-नवम्बर का होता है ।

पौधे लगाने की विधि –  60 से 90 सै.मी. की दूरी पर 60 से 75 से.मी. गहरे गोलाकार गढ़े खोदें, प्रति गढ़ा 5 कि.ग्रा. सड़ी गोबर की खाद व 2 ग्राम एण्डोसलफान डसट मिलाकर गढ़ा दोबारा भर दें । पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें ।

पौधे तैयार करना –  सितम्बर से मध्य नवम्बर तक राजाइंडीका, रोजा बर्बोनियाना या रोजा मल्टीफलोरा रूट स्टाक पर टी बडिग से पौधे तैयार किये जाते हैं ।

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खाद की मात्रा –  खेतों में लगे पौधों मे खाद की निम्न मात्रा प्रूनिंग कटाई- छटाई करने के पश्चात डालें ।

1. नत्रजन 40-60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर

2. फास्फोरस 20-30 ग्राम प्रति वर्ग मीटर

3. पोटाश 20 ग्राम प्रति वर्ग मीटर

कटाई-छटाई –  गुलाब में प्रूनिंग अति महत्वपूर्ण है और 15 सितम्बर से 15 अक्तूबर इस का उपयुक्त समय है । भूमि से 30 से.मी. की ऊंचाई पर पौधों की प्रूनिंग की जाती है । मिनीएचर, पोलिएंथा व क्लाईम्बर में प्रूनिंग नहीं की जात केवल सूखी टहनियां काटते हैं । कटी सतह पर 0.15 प्रतिशत बावस्टीन या बलाईटोक्स पेस्ट लगा दें ।

फूल तोड़ना –  जब कली पर पूरा रंग आ जाए तो सवेरे या शाम को फूलों को तोड़कर पानी के टब में डाल देना चाहिए । इसके बाद

दोबारा फिर पानी में ही तने को 2 से.मी. की दूरी पर दोबारा काटना चाहिए ।

फूलों की पैकिंग –  20-20 फूलों के तने को अखबार में लपेट कर 100 से.मी. लम्बे, 50 से.मी. चौड़े 6-1/2 से.मी. गहरे गत्ते के डिब्बों में पैक करके मण्डी में बिक्री हेतु भेजा जाता है ।

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शुद्ध आय –  एक एकड़ भूमि में गुलाब के फूलों की खेती करके लगभग 25,000/- रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो जाती है ।

गुलाब के फूलों  मे लगने वाले कीड़े व बीमारियां

1. डाईबैक –  पौधा ऊपर से काला नीचे की ओर सूखना शुरू होता है और एक शाखा या पूरा पौधा मर जाता है ।

उपचार – रोगग्रस्त हिस्से को काटकर 0.2 प्रतिसथ बावस्टीन की पेस्ट लगा दें ।

2. रोज स्केल –  मुख्य तने पर भूरी तह जम जाती है । तना मर जाता है ।

उपचार –  पौधे धूप वाले स्थान पर लगाएं, ज्यादा पानी न भऱें । प्रभावित हिस्सा काट दें । मिट्टी का तेल प्रभावित भाग पर लगाएं ।

3. चेप्पर वीटलः- रात को पत्ते खाते हैं ।

उपचार –  0.2 प्रतिशत मैलाथियान या 0.04 प्रतिशत मोनोक्रोटोफास का स्प्रे करें ।

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