फूलगोभी (Cauliflower) की खेती की उन्‍नत विधि |

सब्जियों में फूलगोभी का प्रमुख स्थान है। इसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रटे व खनिज लवण प्रर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। फूलगोभी की अच्छी पैदावार लेने हेतु निम्न उन्नत विधियॉ अपनानी चाहिए :

फूलगोभी

प्रजातियां तथा नर्सरी डालने एवंरोपाई का समय

प्रजातिया पौधशाला में बोने का समय रोपाई का समय फूल मिलने का समय
(अ) मैदानी
अगेती-पूसा कातकी, अर्ली पटना, अर्ली कुवारी,
पूसादीपाली, पूसा अर्ली सिन्थेटिक, पंतगोभी-2, 3 व 4
15 मई से 30 जून तक जून-जुलाई सितम्बर-नवंबर
मध्यम– हिसार-1, पंत शुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा शरद 15 जुलाई से मध्य अगस्त 15-30 सितम्बर दिसम्बर-जनवरी
पछेती-स्नोवाल-16, पूसा स्नोवाल-1, पूसा स्नोवाल के-1 सितम्बर से प्रथमअक्टूबर सप्ताह अक्टूबर-नवम्बर 15 जनवरी से 31 मार्च
(अ) पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 1200 मीटर से ऊपर
1200 से 1800 मीटर
पूसा स्नोवाल-1, पूसा स्नोवाल के-1, स्नोवाल-16
अगस्त से सितम्बर सितम्बर-अक्टूबर जनवरी- मार्च
1800 मी. से ऊपर
स्नोवाल-16, पूसा स्नोवाल के-1
मार्च-अप्रल अप्रलै – मई (सिंचित) जुलाई-अगस्त

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बीज दर

अगेती तथा मध्यम प्रजातियां

500 से 600 ग्रा प्रति हेक्टेयर रोपाई के लिए।

पछेती

350 से 400 ग्रा बीज प्रति हेक्टेयर रोपाई के लिए।

पौध तैयार करना

बीज को भूमि से उठी हुई एवं भलीभांति तैयार क्यारियों में 10 से.मी. दूरी पर बनी कतारों में बोयें। बोने के बाद क्यारी को घास-फूस से ढक दें तथा ऊपर से हजारे द्वारा थोड़ा-थोड़ा पानी देते रहे। अंकुरण होने के तत्पश्चात् घास-फूस हटा दिया जाय। अगेती किस्म की नर्सरी को अधिक वर्षा से हानि पहुंचती है। अतः क्यारी को एक मीटर की ऊंचाई पर पारदर्शी प्लास्टिक की चादर से लकड़ी या लोहे के अर्ध चन्द्राकार फ्रमे पर ढंके। प्लास्टिक सीट भूमि की सतह से 30 से.मी. ऊपर ही बांधे, ताकि वायु संचार में बाधा न आये।

उर्वरक

80-120 कि.ग्रा. नत्रजन, 60-80 किग्रा. फास्फोरस तथा 40-60 कि.ग्रा. पोटाश तत्व रोपाई से पहले भूमि में मिला दें। अगेती में कम तथा पछेती व मध्यम समय की प्रजातियों में अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है। नत्रजन की शेष 60 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टर की दर से रोपाई के 3-4 सप्ताह बाद टापड्रि संग के रूप मे प्रयागे करे। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरको का प्रयागे लाभप्रद होता है। भूमि में सूक्ष्म तत्वों जैसे बोरोन व मालीब्डने म की कमी होने पर 10-15 कि.ग्रा. बोरेक्स एवं 1.0-2.0 कि.ग्रा. अमाे नयम मालीब्डटे प्रति हेक्टेयर का भी प्रयागे करे।

रोपाई

अगेती – 45*45 से.मी. पंक्ति से पंक्ति एवं पौध से पौध।
मध्यम – 60*45 से.मी. पंक्ति से पंक्ति एवं पौध से पौध।
पछेती – 60*50 से.मी. पंक्ति से पंक्ति एवं पौध से पौध।

अगेती फसल की रोपाई मेड़ो पर एवं अन्य प्रजातियों की समतल क्यारियो में करें।

फूलगोभी की सिंचाई

वर्षा से पूर्व एवं अक्टूबर -नवम्बर में 7-10 दिन के अन्तर पर तथा दिसम्बर-जनवरी में 15 दिन के अन्तर पर सिंचाई करनी चाहिए। वर्षा ऋतु में सिंचाई की अधिक आवश्यकता नहीं होती है बल्कि जल निकास की व्यवस्था करें।

फूलगोभी की निराई-गुड़ाई

2-3 निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है। विशेषतः अगेती फसल मे रोपाई के एक माह बाद पौधों पर मिट्टी चढ़ाना लाभकर होता है
खरपतवार नियंत्रण हेतु एलाक्लोर 2.00 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व प्रति हैक्टर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के तुरंत बाद छिरकाव करें तथा रोपाई के 45 दिन बाद एक निराई अवश्य करें।

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फूलगोभी की फसल सुरक्षा

रोग

डैम्पिग आफ/आर्द्र विगलन

यह रोग साधारणतया पौधशाला में ही लगता है। जिसके कारण पौध गलकर नष्ट हो जाती हैं। इसकी रोकथाम निम्नलिखित ढंग से करें।

मृदा उपचार

15 अप्रैल से 15 जनू के बीच क्यारियां के ऊपर सफेद पालीथीन की मोटी चादर से मिट्टी को ढक दें अथवा बुवाई के पहले मृदा को 3 ग्राम
थायरम प्रति वर्गमीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से उपचार करें। बीज का उपचार 2.5 ग्राम थायरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से करें।

ब्लैक राट (काला सड़न)

पत्तियो के किनारे से अ (वी) आकार के ‘‘पीला क्षेत्र’’ बनाते है। नसें काली पड़कर पत्तियां सड़ने लगती है। इसके लिए स्ट्रेस्ट्रेप्टोमीसन के 0.01 प्रतिशत तथा कापर आक्सीक्लोराइाड के 0.3 प्रतिशत मिश्रण के घाले का छिड़काव करें।

आल्टरनेरिया लीफ स्पाट

पत्तियों पर गोलाकार काले भूरे धब्बे बनते हैं। इसके नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब 0.2 प्रतिशत या कापर आक्सीक्लोराइड के 0.3 प्रतिशत घोल का 15 दिन के अन्तर पर दो-तीन छिडकाव करें।

कीट

इस फसल में प्रभाविक अवस्था में टिड्डा एवं बाद की अवस्था में तम्बाकू के गिडार का प्रकोप होता है। इनसे बचाव के लिए मेलाथियान 2 मिली/ली. अथवा कार्बरिल (50 प्रतिशत ) घुलनशील चूर्ण के 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घाले कर प्रकोप होने पर छिड़काव करें। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि फूलगोभी के कटाई के 15 दिन पहले ही छिड़काव अवश्य बन्द कर दे।

उपज

उन्नत ढगं से खेती करने पर अगेती फसल 150 से  200 कुन्तल एवं पछेती फसल से 250 से 300 कुन्तल/हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है।

One thought on “फूलगोभी (Cauliflower) की खेती की उन्‍नत विधि |

  1. Anil Kumar Singh says:

    Fruitful

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