कैसे करें मधुमक्खी पालन? मधुवाटिका में मधुमक्खियों की देखरेख एवं प्रबन्धन.

कैसे करें मधुमक्खी पालन ? मधुवाटिका एवं प्रबन्धन

 मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी पालन

मधुमक्खियों सहित मौन गृह रखे जाने वाले स्थान को मधुवाटिका कहते है। अधिक शहद उत्पादन लेने के लिए यह आवश्यक है कि पूरे वर्ष भर
मधुवाटिका की उचित देख रेख समयानुसार करे। एक सफल मौन पालक को मौसम तथा विभिन्न ऋतुओं के अनुसार मौन को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में ज्ञान बहुत जरूरी है| विभिन्न ऋतुओं के अनुसार मौन गृह का देख-रेख करते हुये मौन पालक अपेक्षाकृत अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। अतः एक मौनपालक को मौसम के अनुसार निम्न प्रकार से मौनगृह का प्रबन्धन करना चाहिए-

 

मधुमक्खी पालन- बसन्त ऋतु में मौन प्रबन्धन –

 मौन गृह

मौन गृह

यह मधुमक्खियों एवं मौन पालको के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस समय लगभग सभी स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में पराग एवं मकरन्द मिलता है, जिससे शहद उत्पादन एवं मौनो की संख्या में काफी वृद्वि होती है जिससे मौन पालकों को अन्य मौसम की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त होती है।

1. शरद ऋतु समाप्त होने पर मौन गृहां की पैकिंग
हटा दे ।

2. मौन गृहो को खाली कर उनकी अच्छी सफाई करें।

3. पेटी से नमी को भली भाँति सुखा लें तथा मौनगृह
के दरारों में 500 ग्राम गन्धक को का बुरकाव कर
अष्टपादी।

4. मौन गृहों को बाहर से सफेद पेन्ट लगाकर आने
वाली गर्मी सें मौनो एवं मौन गृहों की रक्षा करें।

5. बसन्त ऋतु के प्रारम्भ में मौन वंशो को कृत्रिम
भोजन देने से इनकी सख्ंया व क्षमता बढती है,
जिससे अधिक से अधिक उत्पादन लिया जा सके ।

6. यदि मौनगृह की रानी पुरानी हो गयी हो तो  पुरानी रानी को नष्ट करें और इसके बदले नए मधुमक्खी रानी पाएं|

7. यदि मौन गृह में मौनो की संख्या बढ़ गयी हो तो
अतिरिक्त फ्रेम मोमशीट लगा दें, जिस पर
मधुमक्खियॉ छत्ते बना सके ।

8. यदि पहले के बने हुए छत्ते रखे हो तो उनको
मौनवंशो को देना चाहिए।

9. समय समय पर छत्ते से शहद को मधु निष्कासन
यन्त्र की सहायता से शहद निकाल लें। इससे
मधुमक्खियॉ अधिक क्षमता के साथ कार्य कर सके।

10. नर की संख्या अधिक होने पर नर प्रप च
लगाकर उनकी संख्या को नियन्त्रित करें ।

 

मधुमक्खी पालन- ग्रीष्म ऋतु में मौन प्रबन्धन –

ग्रीष्म ऋतु में मौनो की देखभाल जरूरी होती है जहॅा पर तापमान 40 डिग्री सेन्टीग्रेट से ऊपर पहुँच जाता है, वहॅा पर

1. मौन गृहों को किसी छायादार स्थान में रखे , परन्तु
ध्यान रहे सुबह की सूर्य की रोशनी मौन गृहों पर
अवश् य पड़नी चाहिए, जिससे मधुमक्खियॉ सुबह से
ही सक्रिय हो कर अपना कार्य कर दें।

2. किन्ही-किन्ही स्थानों पर बरसीम, सुर्यमूखी, इत्यादि
की खेती होने से यह मधुस्त्राव का समय भी हो
सकता है। अतः इस समय भी शहद उत्पादन का निष्कासन  करना चाहिए|

-मधुवाटिका के आस-पास साफ एवं बहते पानी
उचित व्यवस्था करें, गर्मी में पानी की अधिक आवश्यक होती है।

-मौनों को लू से बचाने के लिए बाड़ का प्रयोग करे
जिससे सीधी हवा मौनगृहो के अन्दर न घुस पाए ।

-अतिरिक्त फ्रेम को बाहर निकालकर उचित तरिके
से भण्डारण करें, जिससे मोमी पतंगा का प्रकोप न
हो।

-यदि छायादार स्थान की वयवस्था न होने पर बक्से
के उपर छप्पर या पुआल डालकर उसे सुबह शाम
भिगोकर मौनगृह का तापमान कम करें।

-कृत्रिम भोजन की आवश् यकता होने पर, 50 : 50
के अनुपात में चीनी एवं पानी उबाल कर ठंडा
करके कटोरी या फीडर में रखकर मौन गृह में
रखें।

-मौनगृह के स्टैण्ड की कटोरी में प्रतिदिन साफ एवं
ताजा पानी डालें।
-यदि मौनां की संख्या ज्यादा हो एवं भीड़ की स्थिती
हो तो अतिरिक्त फ्रेम डाले।

 

मधुमक्खी पालन-शरदऋतु में मौन प्रबन्धन

 

उत्तराखण्ड में विशेषतः ठण्ड अधिक होने से शरद ऋतु में तापमान कभी कभी 1 या 2 डिग्री पहुँच जाता है, ऐसे में मौन वंशो को सर्दी से बचाना आवश् यक होता है। सर्दी से बचाने के लिए

1. मौनपालक को अक्टुबर में टाट की बोरी की दो
तह आन्तरिक ढक्कन के नीचे बिछा दे जिससे
मौन गृह का तापमान गर्म एवं एक सा बना रहे।
यदि सम्भव हो तो मुख्य द्वार को छोड कर पूरे
बक्से को पालीथीन से या घास फूस या पुआल
की टाट बनाकर बक्सो को ढक दें ।

2. इस समय मौन गृहो को ऐसे स्थान पर रखें
जहॉ की जमीन सूखी हो एवं सुबह से शाम तक
धूप मिलती रहे जिससे मधुमक्खियॉ अधिकतर
समय तक कार्य करती रहे।
3. अक्टूबर माह में यह सुनिशि् चत करें कि यदि
रानी एक साल हो तो नयी रानी उत्पन्न कराना
चाहिए जिससे शरद ऋतु में आवश्यक संख्या
बनी रहे एवं मौन वंश कमजोर न हो।

4. शीतलहर का प्रकोप या मौसम खराब होने के
पहले मौन गृह में आवश्यक मात्रा में शहद एवं
पराग को छोड़ दे । यदि शहद कम या न हो तो
मौन वंशो को 50 :50 के अनुपात में चानी एवं
पानी को उबालकर ठंडा करके मौनगृहो के
अन्दर रखें, जिससे मौनो को भोजन की कमी न
हो।

5. पुराने एवं टूटे बक्से की मरम्मत का कार्य
अक्टूबर-नवम्बर तक अवश्य करलें जिससे
बक्सों को सर्दियो से बचाया जा सके।

6. इस समय मौन वंशो को फूल या पराग वाले
स्त्रोत के पास रखें, जिससे कम समय में अधिक
से अधिक मकरन्द एवं पराग एकत्र किया जा
सके।

7. ज्यादा ठंड होने पर मौन गृहो को न खोलें।
अन्यथा अवयस्कों के ठडं से मरने का डर रहता
है एवं श्रमिक मधुमक्खियॉ डकं मारती है। बहुत
ऊँचाई वाले स्थानो पर गेहूँ का भूसा या धान
की पुआल से अच्छी तरह ढक देना चाहिए ।

घरछूट या बकछूट –

इस ऋतु में भारतीय मौनो मे अधिकां श् |तः पाई जाने वाली मधुमक्खियों का वकछूटजन्मजात स्वभाव होता है, जबकि इटैलियन मौनो में यह बहुत कम पाया जाता है। इस प्रक्रिया में मौने किसी विशेष परिस्थितियों में या कभी कभी सामान्य परिस्थितियों में भी पुराना गृह छोड़ कर नये एवं
उपयुक्त स्थान पर अपना छत्ता बनाती है। सामान्यतः जब मौन गृह में स्थान की कमी होने, मौन वंश में कोई बीमारी लग जाने अथवा भोजन की कमी में होती है।बकछूट रोकने के लिये बक्सो की लगातार निरिक्षण के साथ-साथ निम्न उपायों को अपनाऐं-

रोकथाम के उपाय .

-नयी एवं गर्भित रानी की उपस्थिति को सुनिश्चित
करे ।

-यदि एक रानी के अलावा अन्य बन रहे रानी
कोष्ठक को शीघ्रता नष्ट कर दें।

-मौन गृह में बहुत भीड़ या मौनो की संख्या बढ़ने
पर अतिरिक्त फ्रेम देकर उनको समायोजित करें ।

-पुरानी रानी को, जब कई रानी कोष्टक तैयार हो
रहे हो ता,एक स्वस्थ रानी कोष्टक को छोडकर
सभी अन्य कोष्टकों को नष्ट करते हुये नई रानी से
बदल दें ।

-मौन गृह में शहद की कमी होने पर कृत्रिम भोजन
दें।

-बीमारी या कीट का प्रकोप होने पर उनका रोकथाम
करे।

-रानी द्वार का प्रयोग कर रानी को बाहर जाने से
रोके।

बकछूट को पकड़ना –

बकछूट को पकड़कर वापस मौन गृह में लाना एक मौनपालक के लिये आसान कार्य है। सामान्यत्या, अच्छा मौसम में लगभग 10 बजे से 2 बजे के बीच दिन में बकछूट होता है। बकछूट की प्रक्रिया में मौनें अपने पेट में शहद भर कर पुराने मौन गृह के आस-पास झाड़ी या पेड़ पर एकत्र होती हैं। इनको वापस लाने के लिए झाड़ी के नीचे एक खाली मौन गृह रख कर झाड़ी को हिला देते हैं, जिससे टहनी पर एकत्र हुई मधुमक्खियॉ खाली बक्से में गिर जाती है और उनको वापस लाकर नया वंश बना सकते है।

यदि बकछूट कही पेड़ पर या ऊँचाई पर है तो बकछूट टोकरी का प्रयोग करते हैं। इसमे टोकरी में थोड़ा शहद लगाकर झुण्ड के पास टॉग देते है। थोड ी ही देर बाद शहद की गन्ध से पूरा झुण्ड टोकरी में आ जाता है और इनको वापस लाकर नये बक्से जिसमें एक डिम्भक युक्त फे म ्र हो झाड़ दिया जाता है। बाद में बक्से को उचित स्थान पर रख देते हैं।

मौन वंशों को मिलाना-

भारादरितु में कमजोर मौन वंश ठंड के कारण मर जाते हैं जिससे मौनपाकल को कॉफी हानि होती है।अतः शरद ऋतु के ठीक पहले कमजोर मौन वंशो को
शक्तिशाली वंश सें मिला कर इन मक्खियों को मरने से बचाते हैं या शक्तिशाली वंशो को और शक्तिशाली बनातें हैं।

मौन वंशो को मिलाने के लिए कमजोर वंश की रानी को मार कर मौनो को गृह एवं डिम्भक समेत शहद खण्ड में डालकर शक्तिशाली बक्से के शिशु खण्ड के ऊपर, जिस पर एक बारीक छिद्र बने हुए अखबार या पेपर रखते हैं, पर रख देते हैं। एक या दो दिन बाद फेरोमोन का आदान प्रदान होने से मधुमक्खियॉ एक दूसरे से परिचित हो जाती है एवं अखबार जो शिशु खण्ड और शहद खण्ड के बीच में रखा होता है,  काटकर एक दूसरे खण्ड में आती जाती हैं। अंत में एक में मिल जाती हैं।

मौन वंशे की संख्या बढाना –

मौन वंशे की संख्या बढाने की सबसे अच्छी विधि बकछूट उत्पन्न करके करने की है। इससे विधि में मौन की संख्या में तेजी से वृद्धि होने के साथ साथ छत्ता बनाने का कार्य भी तेजी से होता है। अतः उपयुक्त वर्णित विधि से बकछूट कराकर मौन वंशो की संख्या बढाकर अपेक्षाकृत अच्छे वंश तैयार किये जा सकते है।सामान्य रूप से पुराने मौन गृह को एक तरफ लगभग 2 फीट हटाकर इसके स्थान पर नया गृह रखे
एवं पुराने गृह से रानी सहित फ्रेम को नये गृह में डाल दें । दो या तीन दिन बाद इनके बीच की दूरी बढ़ा दें तो पुराने वाले मौन गृह में भी मौने नयी रानी का निर्माण प्रारम्भ हो जाता है, परिणामस्वरूप नया वंश तैयार हो जाता है।

श्रमिको द्वारा शहद की चोरी या डकैती –

-साधारणतः यह देखा गया है कि शक्तिशाली वंश,कमजोर वंशो से शहद की चोरी या डकैती करते हैं। ऐसा तभी होता है जब प्रकृति में मकरन्द एवं
पराग की कमी होती है या कुछ मौन गृह में ज्यादा शहद हो और कुछ में नहीं है या कुछ में कृत्रिम भोजन दिया गया हो एवं कुछ में नहीं दिया गया हो।
-शहद की चोरी रोकने के लिए पहले यह सुनिश्चित करें कि सभी मौनगृहों में शहद की उपलब्धि एक सी हो। इसके बाद सभी मौनगृहो में कृत्रिम भोजन एक साथ दे ।

-सभी मौन वंशो में मौनो की संख्या लगभग एक सी
रखें तथा मुख्य द्वार को छोटा रख कर इस समस्या
से बचा जा सकता है।
-मुख्य द्वार के अलावा अन्य छिद्र या दरार जिनसे
मौने मौनगृहो के अन्दर जा सकती है, उनको बन्द
कर दिया जाये ।
-एपिस मैलीफेरा एवं एपिस सिराना इंडिका जाति की
मौने एक मध्ुवाटिका में न रखी जाये।

 

उपर्युक्त सभी बातों को प्रयोंग में लाकर मौन पालक अपने मौन बक्सों का प्रबन्धन करते हुए अपने उत्पाद एवं आय को बढ़ा सकते है।

 

 

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